मध्यप्रदेश में आईएसआई के लिए जासूसी करने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जासूसी कांड में एटीएस की गिरफ्त में आए सतना के बलराम सिंह का विश्व हिन्दू परिषद से कनेक्शन सामने आया है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व नेताओं का इधर-उधर होना जारी है। बसपा के दो प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव बृज लाल खाबरी के अलावा पूर्व मंंत्री ध्रुव राम है।
भारतीय मूल के छात्र ध्रुव तलाती ने आईक्यू टेस्ट में 162 अंक हासिल करके अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग को भी पीछे छोड़ दिया है। लंदन में रहने वाले ध्रुव ने दुनिया की सबसे बड़ी और पुरानी आईक्यू टेस्ट सोसाइटी मेंसा के टेस्ट में यह स्कोर हासिल किया।
बहुजन समाज पार्टी को छोड़ने का सिलसिला जारी है। विधायक रोमी साहनी और बृजेश वर्मा ने बसपा प्रमुख मायावती पर पैसे लेने का आरोप लगा पार्टी छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि कुछ और विधायक मायावती का साथ छोड़ सकते हैं।
यात्रा भत्ते में घोटाले के आरोप में फंसे सांसद अनिल साहनी ने अपने बचाव में नया पर्दाफाश किया है कि ‘मैंने एलटीसी गिरोह के सदस्यों द्वारा मेरे नाम से फर्जी बिल जमा करने के बारे में 2013 में ही अधिकारियों से शिकायत की थी।’
लोगों की पहचान, संस्कृति और राजनीति को आकार देने के पीछे न अनगिनत आंदोलनों और अभियानों का हाथ होता है। शायद अनगिनत, और भीष्म साहनी जैसी शख्सियत को गढ़ने में भी स्वतंत्रता आंदोलन, पूर्वाग्रहों और अज्ञानता से जंग के कई अभियान गुजरे होंगे इसलिए उनका जीवन और उनके संस्मरण आज के दौर के लिए प्रासंगिक हैं।
पहली बार मैं किसी मामले में अमित शाह से खुद को पूरी तरह सहमत पाता हूं। यह कि बिहार चुनाव केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों और कामकाज पर जनमत संग्रह नहीं है।
लेखक परिचय: 8 अगस्त 1915 में रावलपिंडी में जन्म। आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों में एक। सन 1937 में लाहौर गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एमए करने के बाद उन्होंने सन 1958 में पंजाब विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। विभाजन के बाद भारत आकर समाचार पत्रों में लिखा और भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) से भी जुड़े। अंबाला और अमृतसर में अध्यापक रहने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में भी साहित्य के प्रोफेसर रहे। भाग्य-रेखा, पहला पाठ, भटकती राख, पटरियां, वाङचू, शोभायात्रा, निशाचर, पाली नाम से कहानी संग्रह के साथ झरोखे, कड़ियां, तमस, बसंती, मय्यादास की माड़ी, कुंतो, नीलू नीलिमा नीलोफर उपन्यास बहुत चर्चित रहे। इस साल उनका जन्मशताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। सन 1975 में तमस के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार और इसी वर्ष शिरोमणि लेखक अवार्ड (पंजाब सरकार) मिला। सन 1980 में एफ्रो एशियन राइटर्स असोसिएशन का लोटस अवार्ड, 1983 में सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड और 1998 में पद्मभूषण अलंकरण से विभूषित किया गया।