नोटबंदी के 35 वें दिन भी बुधवार को आम आदमी को राहत मिलती नहीं दिखी। बैंकाें तथा एटीएम में पर्याप्त नकदी नहीं थी, जिसकी वजह से लोगाें को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला पूरी तरह देशहित में है। उन्होंने कहा है कि इससे जनता को कुछ परेशानी जरूर हो रही है मगर यह फैसला सही दिशा में उठाया गया है।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने नोटबंदी पर पीएम नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने साफ कहा है कि पीएम मोदी अपने वादे के मुताबिक क्या आगामी 35 दिनों में जनता की परेशानियों का अंत कर देंगे? नहीं तो बताएंं कि वह और कितने दिन जनता को तड़पाएंगे? लालू प्रसाद यादव ने पीएम मोदी से सवाल भी किए हैं।
नोटबंदी के फैसले से आम लोगों को हो रही परेशानी को लेकर भाजपा को जहां अपनी ही सहयोगी शिवसेना के हमलों का सामना करना पड़ रहा है वहीं अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी मोदी सरकार पर तंज कसा है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने 500 और 1000 रूपये के नोट बंद करने के केन्द्र सरकार के कदम को तानाशाही और अहंकार से भरा बताते हुए शुक्रवार को कहा कि देश के करोड़ों गरीबों और मेहनतकशों को इससे पीड़ा हो रही है और जब सरकार इस पीड़ा को समझ ना पाये तो उसके बुरे दिन दूर नहीं।
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज कहा कि एक रैंक एक पेंशन (ओआरओपी) लागू होने से 95 प्रतिशत सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को लाभ मिला है तथा शेष पांच प्रतिशत लोगों के समक्ष आ रही समस्याओं का अगले दो माह में समाधान कर दिया जाएगा।
खून की दलाली बयान देकर राहुल घिर गए हैं। इस बयान पर आज भारतीय जनता पार्टी ने बाकायदा एक प्रेस वार्ता आयोजित की और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोल दिया। अमित शाह ने साथ में केजरीवाल पर भी निशाना साधा।
निजी वाहनों के लिए सम और विषम नंबरों की योजना को लेकर व्यापक पैमाने पर जताई जा रही आशंकाओं के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इस योजना को सीमित समय के लिए आजमाया जाएगा और यदि लोगों को इससे समस्याएं होती हैं तो इसे रोक दिया जाएगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि वह राजकोषीय घाटे को लेकर चिंतित नहीं हैं तथा सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए अतिरिक्त व्यय की जरूरतों के बावजूद घाटे को सीमित रखने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
घंटों कुर्सी पर बैठ कर काम करने वाले भले ही मजबूरी में बैठते हों या मर्जी से, उनमें एक चिंता बराबर बनी रहती है कि उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अब यह सोच कर परेशान होने की जरूरत नहीं है।