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चित्तूर फायरिंग: उच्च न्यायालय ने एसआईटी से 60 दिनों में जांच पूरी करने को कहा

चित्तूर फायरिंग: उच्च न्यायालय ने एसआईटी से 60 दिनों में जांच पूरी करने को कहा

हैदराबाद उच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के शेषाचलम जंगलों में 7 अप्रैल को पुलिस फायरिंग में 20 लोगों के मारे जाने की घटना की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम एसआईटी को निर्देश दिया कि वह अपनी तफ्तीश 60 दिनों में पूरी कर अदालत में रिपोर्ट सौंपे।
अक्षय तृतीया के पार है बाल विवाह का क्षय

अक्षय तृतीया के पार है बाल विवाह का क्षय

21 अप्रैल को आखा तीज यानी अक्षय तृतीया का अबूझ सावां बीत गया। अबूझ सावां मतलब हिंदु विवाह का सर्वव्यापी शुभ लग्न। कहते हैं, इस दिन विवाह के लिए मुहर्त निकालने या जन्मकुंडली मिलान की जरूरत नहीं पड़ती। अक्षय तृतीया को आरंभ विवाह का शुभ काल पीपल पून्यो यानी पीपल पूर्णिमा तक 12 दिन रहता है।
बाल विवाह विरोधी कानून मुस्लिमों पर लागू: कोर्ट

बाल विवाह विरोधी कानून मुस्लिमों पर लागू: कोर्ट

मद्रास उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में कहा है कि बाल विवाह रोकने संबंधी कानून मुस्लिम पर्सनल लॉ के खिलाफ नहीं है तथा यह पर्सनल लॉ पर भी लागू होगा क्योंकि यह लड़कियों के कल्याण के लिए बनाया गया है।
महाराष्ट्र सरकार को पता नहीं कल्याण गृहों में बच्चों की संख्या

महाराष्ट्र सरकार को पता नहीं कल्याण गृहों में बच्चों की संख्या

राज्य की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री विद्या ठाकुर ने यहां विधान परिषद में कहा, कुल 43 सरकारी और करीब ।, 100 निजी लेकिन सरकार से सहायता प्राप्त बाल कल्याण गृह हैं।
बाल चलचित्र फिल्मोत्सव

बाल चलचित्र फिल्मोत्सव

बाल फिल्म उत्सव कल शुरू हो रहा है। इसकी शुरूआत पीवीआर सिनेमा (सेलिब्रेशन मॉल), आईएनओएक्स सिनेमा, अशोक सिनेमा और पिक्चर पैलेस उदयपुर में होगी।
सिर्फ दावों से नहीं होता विकास

सिर्फ दावों से नहीं होता विकास

विकास के वादे के साथ सत्ता में आई नई सरकार ने सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और विधानों पर निर्दयता से धावा बोल दिया है। अक्तूबरए 2014 में यह अफवाह उड़ाई गई कि कुछ जिलों में मनरेगा योजना बंद कर दी जाएगीए हालांकि प्रस्तावित बदलावों को लागू नहीं किया गया। मनरेगा के लिए वित्त की कमी करके और मजदूरी के भुगतान में देरी करके इसको धीरे.धीरे खत्म करने की स्थिति पैदा की जा रही है।
शिक्षा के सपने का कानूनी ककहरा

शिक्षा के सपने का कानूनी ककहरा

बच्चों को शिक्षा के लिए सदमे और डर से मुक्त माहौल देने के लिए शारीरिक दंड एवं वार्षिक परीक्षा आधारित पास-फेल की प्रणाली खत्म कर दी जा रही है। इसके बदले निरंतर मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है। विधेयक में सभी विद्यालयों के पाठ्याचार को संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप ढालने का प्रावधान किया है। इससे कुछ संस्थाओं, संगठनों के स्कूलों में सांप्रदायिक और इस तरह के अन्य एजेंडे को सीमित करने मे मदद मिलेगी।
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