परदेसी होने का आनंद बहुत दिखाई देता है लेकिन उनके दिल का दर्द आसानी से नहीं समझा जा सकता। भारत से जाकर परदेस में बसे भारतीयों पर हमें गौरव महसूस होता है।
देश के विभाजन के दर्द के बीच बड़े हुए भाजपा नेता अरुण जेटली राजनीति के बड़े मुकाम पर हैं। पीएम नरेंंद्र मोदी के बाद दूसरे नंबर पर राजनाथ सिंह के साथ प्रतिष्ठित तथाा वित्त, कारपोरेट मामले और सूचना प्रसारण मंत्रालय की बागडोर संभाल रहे जेटली का राजनीतिक सफर 70 के दशक में अखिल भारतीय विद़यार्थी परिषद से शुरु हुआ। आज भले ही अरुण जेटली सूचना एवं प्रसारण मंत्री का काम भी संभाल रहे हों मगर 90 के दशक से अबतक उन्होंने शायद कोई फिल्म नहीं देखी है।
नरेंद्र मोदी सरकार की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर सरकारी योजनाओं का महिमामंडन करने के लिए सरकार 100 करोड़ रुपया खर्च कर रही है। ऑडियो-विजुअल पब्लिसिटी निदे्शालय के सूत्रों ने एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र को बताया कि सरकार 85 करोड़ रुपये रेडियो और टेलिविजन के लिए जबकि 18 करोड़ रुपये समाचार पत्रों को विज्ञापन देने के लिए खर्च कर रही है।
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आज कश्मीर के दिल के दर्द की बात की जिसे तुरंत दूर करने की जरूरत है ताकि राज्य के युवा फले-फुले और देश की तरक्की में योगदान करें।
टीवी अभिनेत्री प्रत्यूषा बनर्जी के अपने घर में मृत पाए जाने के दो दिन बाद आज उनके बाॅयफ्रेंड राहुल राज सिंह को पुलिस की पूछताछ के दौरान सांस लेने में दिक्कत होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रत्यूषा की कथित खुदकुशी के मामले में पुलिस उससे दूसरे दिन पूछताछ कर रही थी।
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार को एक बयान में कहा है कि जो भी व्यक्ति या संगठन भारत को दर्द देगा, उसे उसी तरह का दर्द देना चाहिए लेकिन यह कैसे, कब और कहां होगा, वह भारत की पसंद के अनुरूप होना चाहिए। रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी पठानकोठ आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में सामने आई है।
करीब 40 साल पहले पंजाब से अमेरिका बस गए सर्जन शिवदेव सिंह ने अपने तैल चित्रों, चारकोल से बनाए गए स्केच और वॉटर कलर्स के जरिये अपनी जड़ों से जुड़ी यादों को तस्वीरों का रूप दे कर पंजाब के ग्रामीण जन-जीवन की झलक दिखाने की कोशिश की है।
भारत में अपने 20 साल पूरे होने के अवसर पर डिस्कवरी चैनल ने देश की कुछ बेहतरीन कहानियों समेत अपने कुछ सबसे शानदार कार्यक्रमों को विशेष रूप से प्रदर्शित करने की योजना बनाई है।
मसान यानी श्मशान के इर्द-गिर्द भी प्रेम पनपता है। जलती चिता से उठती चिंगारियां दिल की कोमलता को नहीं झुलसा पातीं। नीरज घायवन ने कम संसाधनों में एक बढ़िया फिल्म रच दी है। दो कहानियां अतंतः एक ही मंजिल को पहुंचती हैं, त्रासदी।
गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में आतंकी हमले के इल्जाम से बरी हुए मुफ्ती अब्दुल कयूम ने अपने दर्द को किताब के जरिए बताया है। '11 साल जेल में' शीर्षक से लिखी गई इस किताब में कयूम ने पुलिस प्रताड़ना से लेकर सामाजिक बुराइयों के बारे में विस्तार से लिखा है।