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मोदी के सीने को 5.6 इंच का कर देंगेः राहुल

मोदी के सीने को 5.6 इंच का कर देंगेः राहुल

भूमि विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला तेज करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जयपुर में शुक्रवार को कहा कि यदि भूमि विधेयक मानसून सत्र के दौरान संसद में आता है तो उनकी पार्टी इसे पारित नहीं होने देगी। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर चुटकी लेते हुए कहा कि किसान छह महीने में उनके 56 इंच के सीने को 5.6 इंच के सीने में बदल कर रख देंगे और एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर केंद्र से मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की वैधानिकता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आज केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। यह याचिका अध्यादेश के जरिए फिर से लागू भूमि अधिग्रहण कानून की वैधानिकता को चुनौती देते हुए किसानों के एक संगठन दिल्ली ग्रामीण समाज की ओर से दायर की गई थी। न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ और आदर्श कुमार गोयल की खंडपीठ ने किसानों के संगठन की इस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
भूमि विधेयक पर नीति आयोग राजनीति की काली छाया

भूमि विधेयक पर नीति आयोग राजनीति की काली छाया

मानसून पूर्व नीति आयोग की राजनीति से लोकसभा के मानूसन सत्र और भूमि अधिग्रहण विधेयक पर घनघोर काली घटाएं मंडराने लगी हैं। मतलब लोकसभा में गर्जन-तर्जन होगा, बिजली कड़केगी, विपक्ष की बौछार तेज पड़ेे और संसद बाधित होती। 21 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है और इस सत्र से पहले नीति आयोग की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पंजाब से बाहर भी पंजाबी मछली के चटखारे

पंजाब से बाहर भी पंजाबी मछली के चटखारे

गेंहू और चावल उगाने वाले पंजाब के उन किसानों के लिए अच्छी खबर है, जो कई सालों से इस फसल में घाटा खा रहे हैं। कर्ज चले दबे हैं। लगातार पंजाब ने मछली पालन में पहला स्थान बरकरार रखा हुआ है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने अब मछली पालन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। सरकार ने पूरे पंजाब में मछली पालन में 50 फीसदी सब्सिडी का एलान किया है। यही नहीं सरकार इसे अब वैज्ञानिक स्तर पर शुरू करने जा रही है। जिसके तहत पंजाबी की मछली का बड़े स्तर पर बाहर के देशों में भी निर्यात किया जाएगा।
जुबां पर किसान, निगाहें केंद्र पर

जुबां पर किसान, निगाहें केंद्र पर

मध्य प्रदेश में किसी किसान की जमीन जबर्दस्ती लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम जानते हैं कि किसान और खेती के बिना हमारा राज्य विकास नहीं कर सकता है। किसान हमारी पहली प्राथमिकता है। आउटलुक से बातचीत के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरह जोर देकर यह कहा कि केंद्र के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के तहत उनके राज्य में किसानों के साथ कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं की जाएगी, उससे साफ था कि वह किसानों के हिमायती राष्ट्रीय नेता के तौर पर खुद को स्थापित करने की तैयारी में हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने आप सरकार को दी‌ झिड़की

दिल्ली हाईकोर्ट ने आप सरकार को दी‌ झिड़की

अप्रैल में जंतर-मंतर पर आयोजित आम आदमी की पार्टी की रैली में कथित तौर पर फांसी लगा लेने वाले राजस्थान के किसान को शहीद का दर्जा दिए जाने के दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल के फैसले पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप सरकार से जवाब-तलब किया।
एनडीए में उठी भूमि अधिग्रहण पर श्‍वेत-पत्र की मांग

एनडीए में उठी भूमि अधिग्रहण पर श्‍वेत-पत्र की मांग

केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सहमति बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। बुधवार को वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर किसान नेताओं से मुलाकात की। किसान संगठनों ने भू-स्‍वामियों की मर्जी के खिलाफ जमीन न लेने और देश में आजादी के बाद हुए भूमि अधिग्रहण पर श्‍वेत-पत्र जारी करने की मांग उठाई है।
ऐतिहासिक समझौते में बांग्लादेश को 10,000 एकड़ जमीन का फायदा

ऐतिहासिक समझौते में बांग्लादेश को 10,000 एकड़ जमीन का फायदा

बांग्लादेश के साथ हुए ऐतिहासिक जमीन सीमा समझौते से 41 साल पुराना विवाद हल होने की उम्‍मीद है। इससे बांग्लादेश को करीब 10 हजार एकड़ जमीन का फायदा होगा जबकि भारत को सिर्फ 500 एकड़ अतिरिक्‍त जमीन मिलेगी।
भूमि समझौताः भारत-बांग्लादेश ने इतिहास रचा

भूमि समझौताः भारत-बांग्लादेश ने इतिहास रचा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश की पहली यात्रा के दौरान भारत और बांग्लादेश ने ऐतिहासिक समझौते पर मुहर लगाई जिससे कुछ क्षेत्रों के आदान-प्रदान के जरिये 41 वर्ष पुराने भूमि सीमा विवाद का निपटारा हो सकेगा और द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण अड़़चन दूर हो सकेगी।
व्यापार की राह पर खेती

व्यापार की राह पर खेती

विकास के तमाम दावों और चकाचौंध के बीच खेती और किसानी चर्चा के पाएदान पर ही रहती है। केंद्र सरकार के एक साल पूरे होने पर जहां तमाम दूसरे क्षेत्रों की सघन पड़ताल हो रही है, वहीं कृषि पर तवज्जो कम रही। वह भी तब जब पिछले तीन-चार महीने से मौसम की मार की वजह से फसल बर्बाद होने और किसानों की आत्महत्या ने देश का ध्यान बरबस ही गहराते कृषि संकट की ओर खींचा था। नरेंद्र मोदी सरकार को एक साल में किसानों की आत्महत्या, मुआवजा, भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दे पर विपक्षी दलों ने घेरने की लगातार कोशिश की और इसी पर केंद्र सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। इन तमाम ज्वलंत सवालों और संकट से बाहर निकलने की सरकार की रणनीति पर बिहार के मोतिहारी से पांच बार से सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से बातचीत के प्रमुख अंश
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