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नजीब मामला: हाईकोर्ट ने पूछा, आरोपियों से पूछताछ में इतना वक्त क्यों लगा

नजीब मामला: हाईकोर्ट ने पूछा, आरोपियों से पूछताछ में इतना वक्त क्यों लगा

जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस से कई तीखे सवाल पूछे। न्यायलय ने पुलिस को तमाम राजनीतिक अवराधों से निकलकर नजीब की तलाश करने का निर्देश देते हुए कहा कि उसके लापता होने में कुछ और हो सकता है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी के बीच से कोई इस तरह ओझल नहीं हो सकता।
जेएनयू: कन्हैया सहित 20 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी

जेएनयू: कन्हैया सहित 20 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी

जेएनयू प्रशासन ने कथित देशद्रोह के मामले में आरोपी कन्हैया कुमार और उमर खालिद सहित 20 विद्यार्थियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विश्वविद्यालय ने छात्रों से कुछ दिन पूर्व प्रशासनिक भवन में कुलपति और अन्य अधिकारियों को अवैध रूप से बंधक बनाए जाने के लिए स्पष्टीकरण मांगा है।
छत्तीसगढ़: आदिवासी हत्या मामले में डीयू और जेएनयू के प्रोफेसर पर मामला दर्ज

छत्तीसगढ़: आदिवासी हत्या मामले में डीयू और जेएनयू के प्रोफेसर पर मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित सुकमा जिले में एक आदिवासी ग्रामीण की हत्या के आरोप में जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय की एक-एक प्रोफेसर के साथ कुछ माओवादियों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
नजीब के लिए छात्रों शिक्षकों के प्रदर्शन को जेएनयू ने बताया विघ्नकारी राजनीति

नजीब के लिए छात्रों शिक्षकों के प्रदर्शन को जेएनयू ने बताया विघ्नकारी राजनीति

जेएनयू प्रशासन ने छात्रों और शिक्षकों से परिसर में विघ्नकारी राजनीति और प्रदर्शनों को हतोत्साहित करने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि इससे विश्वविद्यालय का सुगमतापूर्वक चलने वाला कामकाज बाधित हो रहा है और प्रदर्शनों के जरिए अतार्किक मांगें उठायी जा रही हैं।
प्रधानमंत्री का पुतला फूंकने पर जेएनयू ने दिए जांच के आदेश

प्रधानमंत्री का पुतला फूंकने पर जेएनयू ने दिए जांच के आदेश

जेएनयू प्रशासन ने विजयादशमी पर विश्वविद्य़ालय परिसर में विद्यार्थियों के एक वर्ग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और अन्य नेताओं के पुतले जलाए जाने की घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
दशहरा : जेएनयू में रावण नहीं मोदी का पुतला फूंका गया

दशहरा : जेएनयू में रावण नहीं मोदी का पुतला फूंका गया

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई के कुछ छात्रों ने दशहरा के अवसर पर रावण की जगह कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह और योग गुरु बाबा रामदेव समेत उनके तमाम सहयोगियों का पुतला फूंका। छात्र यही नहीं थमे बल्कि इस निंदनीय घटना का वीडियो बनाकर इसे फेसबुक पर भी पोस्ट कर दिया।
जेएनयू में योग और सांस्कृतिक पाठ्यक्रम का प्रस्ताव फिर हुआ खारिज

जेएनयू में योग और सांस्कृतिक पाठ्यक्रम का प्रस्ताव फिर हुआ खारिज

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के शीर्ष निर्णायक निकाय अकादमिक काउंसिल ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति और योग में अल्पकालिक पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिया था। बताया जा रहा है कि आरएसएस और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों के दबाव में इन विषयों में पाठ्टक्रम शुरू रने का प्रसताव तैयार किया गया है।
साल 2015-16 : जेएनयू में यौन उत्‍पीड़न के रिकार्ड 39 मामले

साल 2015-16 : जेएनयू में यौन उत्‍पीड़न के रिकार्ड 39 मामले

हाल के महीनों में विवादों के केंद्र में रहे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में साल 2015-2016 के दौरान यौन उत्पीड़न की 39 शिकायतें दर्ज की गई। जो कि विश्वविद्यालय के रिकार्ड में सबसे अधिक है। विश्वविद्यालय को 2014-2015 के दौरान यौन उत्पीड़न की 26 शिकायतें मिली थीं जबकि 2013-2014 के दौरान यह संख्या 25 थी।
जेएनयू के छात्रसंघ की बैठक : बाहरी लोगों के नाम पर जमकर हुआ हंगामा

जेएनयू के छात्रसंघ की बैठक : बाहरी लोगों के नाम पर जमकर हुआ हंगामा

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) कैंपस एकबार दोबारा विवादों में है। जेएनयू के छात्रसंघ की बैठक में बाहरी लोगों के नाम पर जमकर हंगामा हुआ। छात्रसंघ ने गुड़गांव के होंडा कंपनी के कर्मचारियों को कैंपस में पब्लिक मीटिंग के लिए बुलाया था। ताकि वे छात्रों के मंच पर अपनी बात रख सकें।
एएमयू: कुलपति की नियुक्ति पर उच्चतम न्यायालय ने उठाया सवाल

एएमयू: कुलपति की नियुक्ति पर उच्चतम न्यायालय ने उठाया सवाल

उच्चतम न्यायालय ने आज गैरशिक्षण पृष्ठभूमि के एक व्यक्ति की प्रतिष्ठित अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़ा किया। कुलपति के पद पर पूर्व सैन्य अधिकारी जमीरउद्दीन शाह की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह सवाल उठाया।
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