मोदी सरकार पर तीखे हमले जारी रखते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मीडिया से कहा, जब आपके विचार सरकार से टकराएंगे तो आपके माइक बंद हो जाएंगे। वह देश को संघ और मोदी से बचाने आए हैं। राहुल ने संघ पर शैक्षिक संस्थाओं पर कब्जा जमाने का भी आरोप लगाया है।
संसद में गतिरोध कम करने के लिए सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक में ही कांग्रेस ने आक्रामक रूख अख्तियार कर लिया था। बैठक में कांग्रेस की ओर से साफ तौर पर कहा गया कि जब तक सरकार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का इस्तीफा नहीं मांगती तब तक संसद में कामकाज नहीं होने दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश के झाबुआ इलाके में तेजी से तस्वीर बदल रही है। राष्ट्रय स्वयंसेवक संघ का प्रचार-प्रसार जोरों पर है। इस आदिवासी बहुल इलाके का सांस्कृतिक परिदृश्य बदल रहा है। व्यापमं की मौत की छाया कड़कनाथ मुर्गे की कड़क तासीर पर भी भारी है। आदिवासी शिक्षित नौजवानों का हो रहा पयालयन।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज यह कहते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला किया कि गजेंद्र चौहान की यहां प्रतिष्ठित भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति शैक्षणिक, नौकरशाही और न्यायिक प्रणाली को कमजोर करने की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की बड़ी योजना का हिस्सा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रांत प्रचारकों की तीन दिवसीय बैठक शनिवार को नैनीताल में संपन्न हो गई, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की विचारधारा की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ने पर खुशी जाहिर की। संगठन का आधार बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई थी।
संसद सत्र सुचारू रूप से चले इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला। भूमि अधिग्रहण मुद्दे पर गतिरोध बरकरार है, इसके अलावा ललित मोदी और व्यापमं घोटाले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश की लेकिन सरकार की ओर से इसका कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। विपक्षी दलों ने सत्र के दौरान सरकार को घेरने की तैयारी पूरी कर ली है।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ललित मोदी प्रकरण से अभी उबरी भी नहीं थी कि अब हिंदुत्व के मसले पर घिरती नजर आ रही हैं। विरोधियों के बाद अब अपनों ने ही वसुंधरा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक संगठन ने शिक्षा नीति में बदलाव कर संस्कृत या अन्य शास्त्रीय भाषाओं जैसे अरबी, फारसी, लैटिन और ग्रीक को कम से कम चार वर्ष तक स्कूली शिक्षा में अनिवार्य बनाने की सलाह दी है।