सोमवार को जम्मू-कश्मीर में पकड़े गये लश्कर आतंकी संदीप कुमार शर्मा की मां ने कहा है कि अगर मेरा बेटा आतंकी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। संदीप की मां और भाभी से यूपी एटीएस की टीम ने सोमवार देर रात तक पूछताछ की।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही त्रिवेंद्र सिंह रावत की तुलना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तेजी और तेवरों से की जा रही है। जबकि रावत मानते हैं कि पहाड़ में पहाड़ के हिसाब से रफ्तार रखनी पड़ती है।
अनिल कुंबले के इस्तीफा देने के बाद टीम इंडिया के नए कोच की तलाश शुरू हो गई है। नए कोच के लिए दस उम्मीदवारो को चुना गया गया है। इनमें रवि शास्त्री, वीरेंद्र सहवाग, क्रेज मैकडरमोट, लांस क्यूसनर, राकेश शर्मा, लाजचंद राजपूत, फिल सिमंस, टाम मूडी, डोडा गणेश और रिचर्ड पाइबस हैं।
अर्जुन कपूर और परिणीति चोपड़ा को साथ काम किए पांच साल बीत गए। लेकिन इश्कजादे का भूत अब भी दर्शकों के सिर से नहीं उतरा है।अब दोनों संदीप और पिंकी फरार से दोबारा स्क्रीन शेयर करेंगे। फिल्म को दिबाकर बैनर्जी निर्देशित करेंगे।
बनारस शहर का अपना मिजाज है। भोले की भांग है तो गंगा की निर्मलता भी। इस शहर के मिजाज में ही है, संस्कृति। इस शहर के लिए व्योमेश शुक्ल बहुत जाना पहचाना नाम है। रंगकर्मी, कवि, लेखक व्योमेश की टोपी में एक और पंख लगने जा रहा है। उनकी कविताएं अमेरिका के फिलाडेल्फिया के एक पार्क में बन रही दीवार पर अंकित होंगी।
कांग्रेस के पूर्व एमपी और शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत को सड़क का गुंड़ा कह डाला। इसके बाद जहां कांग्रेस ने उनके बयान से किनारा कर लिया वहीं बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से माफी मांगने की मांग की है।
सेना प्रमुख पर पूर्व सांसद संदीप दीक्षित के बयान को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सख्त रूख अपनाया और इस तरह की बयानबाजी न करने की हिदायत दी है।
सीपीआई नेता बृंदा करात ने आर्मी चीफ को नियंत्रण में रहने की सलाह देते हुए कहा है कि भारत के आर्मी चीफ को इस तरह की बयानबाजी शोभा नहीं देती, उन्हें इससे बचना चाहिए।
मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का मानना है कि मोदी सरकार ने तीन साल में देश को आर्थिक स्थिरता प्रदान की है और सुधारों की दिशा में बड़े कदम बढ़ाए हैं। सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन में भ्रष्टाचार पर अंकुश और जैम व्यवस्था को वे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियां मानते हैं। लेकिन यह भी स्वीकार करते हैं कि तेज आर्थिक वृद्धि दर के बावजूद रोजगार के मौकों की रफ्तार धीमी है। उन्होंने अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और केंद्र सरकार के तीन साल के कामकाज से जुड़े कई अहम मु्द्दों पर आउटलुक के संपादक हरवीर सिंह से बेबाक बातचीत की। कुछ अंश: