शीर्ष भारतीय शटलर साइना नेहवाल ने बर्मिंघम में गत चैम्पियन जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर आल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप के दूसरे दौर में प्रवेश किया।
आनंद अमृतराज के समर्थन में बोलते हुए भारत के शीर्ष टेनिस खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने कहा कि सहयोगी स्टाफ के बदलने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि डेविस कप कप्तान ने परिणाम दिये हैं और अनुशासहीनता के मुद्दे को उचित तरीके से निपटाया है।
रियो पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने उस समय इतिहास रच दिया जब मरियाप्पन थंगावेलू परालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय बन गए जबकि वरूण भाटी ने टी42 ऊंची कूद में कांस्य पदक जीता।
देश में क्रिकेट को सबसे लोकप्रिय खेल माना जाता है। लेकिन बैडमिंटन ने अब इस खेल को पीछे कर दिया है। रियो ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक के लिए हुए महिला सिंगल्स मैच में भारतीय शटलर पी.वी. सिंधु और स्पेन की कैरोलिना मारिन के बीच हुए मैच को विश्व कप क्रिकेट टी-20 सेमीफाइनल मैच से भी ज्यदा दर्शक मिले हैं।
साइना नेहवाल और पीवी सिंधू के लगातार ओलंपिक खेलों में पदक के दौरान इन दोनों खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करने वाले मुख्य बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने कहा कि वह भाग्यशाली थे कि पढ़ाई में अच्छे नहीं थे और आईआईटी परीक्षा पास नहीं कर पाने से उनके सफल खिलाड़ी बनने का रास्ता खुला।
देश में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों और उनके खिलाड़ियों की हालत कितनी खराब है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक नेशनल खिलाड़ी इसलिए मौत को गले लगा लेती है क्योंकि उसको फ्री हॉस्टल की सुविधा नहीं दी गई। हैंडबॉल खिलाड़ी पूजा पटियाला में बी.ए. सेकेंड ईयर की स्टूडेंट थी। उचित सुविधा नहीं मिलने की वजह से उसने खुदकुशी कर ली। उसने खून से अपना सुसाइड नोट देश के पीएम नरेंद्र मोदी के नाम लिखा।
पीवी सिंधु बैडमिंटन में महिलाओं की एकल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर खुश हैं। उन्होंने कहा कि देश को स्वर्ण पदक दिलाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ झोंक दिया था।
कहा जाता है कि गुरु को मुक्ति तब मिलती है, जब शिष्य उससे बड़ा हो जाए। गोपीचंद ने इसे अपनी जिंदगी में अपनाया है। ओलंपिक के लिहाज से देखा जाए, तो आज उनके शिष्य बड़े मुकाम पर खड़े हैं। गोपी से भी ऊंचे मुकाम पर। फर्क बस यह है कि गोपी का कद भी उसके साथ बढ़ता जा रहा है। जीवन में जो सीखा, उसे संसार को वापस करना क्या होता है, इसे गोपी से समझा जा सकता है।
रियो ओलंंपिक में शुक्रवार का दिन भारत के लिए एक स्वर्णिम अवसर बनकर नहीं आया। देश की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु गोल्ड मेडल नहीं जीत पाई। वह स्पेन की विश्व नंबर वन कैरोलिना मारिन की चुनौती नहीं ध्वस्त कर पाईं। फाइनल में उन्हें मारिन ने तीन गेम तक चले मुकाबले में 21-19, 12-21, 15-21 से हरा कर भारत की उम्मीदों को तोड़ दिया। इस तरह पीवी सिंधु ने सिल्वर मेडल जीत देश को रजत सम्मान दिलाया।
दो बार विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू ने लंदन ओलंपिक की रजत पदक विजेता वांग यिहान को हराकर रियो ओलंपिक के महिला एकल सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। सिंधू अब पदक से सिर्फ एक जीत दूर हैं।