कांग्रेस ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दर्शन को लेकर उन पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा मोदी के पास फैशनेबल कपड़े पहनकर केदारनाथ मंदिर जाने के लिए समय है, लेकिन जम्मू कश्मीर में मारे गए सैनिकों के परिजनों से मिलने का समय नहीं है।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट आज से खुल गए हैं। कपाट खुलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रभु केदारनाथ का रुद्राभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
दिल्ली कांग्रेस में नाराज नेताओं का विरोध तेज होता जा रहा है। दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बरखा शुक्ला सिंह ने भी अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष को भेज दिया है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन व कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर कई आरोप लगाए। उनका कहना था कि अगर पार्टी संभल नहीं रही है तो राहुल गांधी पद छोड़ दे। उनका अध्यक्ष बनना एक आपदा से कम नहीं होगा।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की किफायती स्वास्थ्य देखभाल नीति को बदलने की योजना बना रहे राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ओबामाकेयर एक आपदा है और यह नीति बुरी तरह नाकाम रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा जोखिम कटौती के प्रयासों के नवीकरण की 10 सूत्री कार्यसूची रेखांकित करते हुए आज महिला वालंटियरों की शिरकत को बढ़ावा देने पर जोर दिया और सभी तरह की आपदाओं से निबटने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में वृहद सामंजस्य लाने का आह्वान किया।
नेताओं में अंधविश्वास कूट-कूट कर भरा हुआ है। इसी अंधविश्वास के चलते भाजपा अध्यक्ष अमित शाह बद्रीनाथ की यात्रा हेलीकॉप्टर से नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जब भी किसी नेता ने हेलीकॉप्टर से बद्रीनाथ की यात्रा की तो उसकी कुर्सी चली गई। इसी क्रम में उनके उत्तराखंड के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। पहले यह दौरा तीन दिनों का था लेकिन अब दो ही दिन उत्तराखंड में रहेंगे।
तीन साल पहले 16 जून की रात केदारनाथ में हुई भारी जल प्रलय के निशान अब मिटने लगे हैं। केदारनाथ मंदिर के पास शांत बह रही मंदाकिनी के नवनिर्मित किनारे श्रद़धालुओं में शायद यही संदेश दे रहे हैं, कि जख्म कितना भी घातक हो, वक्त सबसे बड़ा मरहम होता है। प्रलयंकारी उफान में 11,755 फुट की उंचाई पर स्थित हिमालयी धाम के डूबने के साथ ही देश भर से आये श्रद़धालु, पुजारी, व्यापारी और स्थानीय लोगों सहित करीब 5000 जिंदगियां बह गई थीं। रह गयी थी बस चीख और पुकार तथा अपनों का क्रंदन। उस मातमी माहौल को केदारनाथ की महिमा ने पीछे कर दिया है।
उत्तराखंड में जून 2013 में आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के दौरान हजारों लोग कई दिनों तक भूखे रहने को मजबूर थे, बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे, सर्दी- बीमारी काल बन निगल रही थी, उस वक्त राहत के काम में जुटे राज्य सरकार के अधिकारी मटन, चिकन और बेहतरीन खाने का लुत्फ उठा रहे थे। सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के जरिये हुए इस सनसनीखेज खुलासे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
भीषण गर्मी और लू से अब तक देश में 1100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। इसके बावजूद अभी तक इसे राष्ट्रीय आपदा नहीं माना जा रहा है। नेपाल भूकंप में तुरंत राहत पहुंचाने वाली केंद्र सरकार भी इस मामले को हल्के में ले रही है।