गुजरात के निकाय चुनाव राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए झटका साबित हुए हैं। हालांकि राज्य की सभी छह नगर निगमों में पार्टी ने फिर से अपनी सत्ता कायम कर ली है मगर राज्य के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस ने जोरदार वापसी की है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह जिले मेहसाणा के जिला पंचायत और नगरपालिका दोनों जगह कांग्रेस की जीत हुई है।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) की पहल से बने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के बैनर तले मेवात के फिरोजपुर झिरका में हुए एक बड़े सम्मेलन में लगभग 100 मुस्लिम गोपालकों को सम्मानित किया गया। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच आरएसएस की ओर से मुस्लिम समुदाय के बीच सामाजिक कार्यों के लिए बनाई गई एक संस्था है। इस मौके पर संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार से मुसलमानों से जुड़े ताजा मसलों पर बातचीत की गई-
पिछले हफ्ते बरेली में विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुईं भाजपा नेता को मेरठ स्थित एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अभी अस्पताल में ही रखने का फैसला किया है। प्रशासन ने उनके समर्थकों के उपद्रव की आशंका को देखते हुए उन्हें छुट्टी देने का इरादा बदल लिया है।
शिवसेना ने साफ कर दिया है कि कोल्हापुर निकाय चुनाव वह अपने दम पर लड़ेगी और भाजपा से गठबंधन नहीं करेगी। इस फैसले ने साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति में 25 वर्ष तक साथ चले दोनों दलों के दिल एक दूसरे से भर चुके हैं और सिर्फ सियासी मजबूरी ने ही उन्हें राज्य सरकार में एक साथ बना रखा है।
मुंबई की लाइफ लाइन लोकल में सफर करना कितना मुश्किलों भरा रहता है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। सैकड़ों लटके हुए यात्रियों को देख कर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन ट्रेन से सफर करने से पहले टिकट खरीदने के लिए भी कम ‘सफर’ नहीं करना पड़ता।
वरिष्ठतम सूचना आयुक्त विजय शर्मा को नया मुख्य सूचना आयुक्त और पूर्व सीबीडीटी प्रमुख केवी चौधरी को नया केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त नियुक्त किए जाने की संभावना है। सरकार और विपक्ष आज मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के नामों पर राजी हो गए। ये पद पिछले नौ महीने से भी ज्यादा समय से रिक्त पड़े हैं। जिसे लेकर सरकार की खूब आलोचना हो रही थी।
कांग्रेस नेता अनिल शास्त्री ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार सहित पिछले 30 वर्ष के दौरान रहने वाली पूर्ववर्ती सरकारों की विदेशी धरती पर आलोचना इसलिए की क्योंकि देश में उनका विश्वास करने वाले अधिक लोग नहीं हैं।
चौ. टिकैत के आन्दोलन में न तो नेताओं की भरमार थी और न पदाधिकारियों की कतार। इस आन्दोलन में शामिल हर व्यक्ति सिर्फ किसान था। चौ. टिकैत जनता के बीच से आए थे और अाखिरी दम तक जनता के बीच रहे। यही सादगी और खरापन उनकी पहचान बन गया। उनकी मृत्यु के बाद किसान आन्दोलन में पैदा खालीपन की भरपाई आज तक नहीं हो पाई है।