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जापान के ओहसुमी को कोशिकाओं के पुनर्चक्रण पर नोबेल चिकित्सा पुरस्कार

जापान के ओहसुमी को कोशिकाओं के पुनर्चक्रण पर नोबेल चिकित्सा पुरस्कार

जापान के योशिनोरी ओहसुमी ने सोमवार को आॅटोफैगी से संबंधित अपने काम के लिए इस साल का नोबल चिकित्सा पुरस्कार जीता। आॅटोफैगी एक एेसी प्रक्रिया है, जिसमें कोशिकाएं खुद को खा जाती हैं और उन्हें बाधित करने पर पार्किंसन एवं मधुमेह जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
आसाराम होना चाहते हैं जवान, नर्स के गाल लगते हैं उन्‍हें कश्‍मीरी सेब जैसे

आसाराम होना चाहते हैं जवान, नर्स के गाल लगते हैं उन्‍हें कश्‍मीरी सेब जैसे

नाबालिग के यौन शोषण के आरोप में जोधपुर की जेल में बंद आसाराम अब भी नहीं सुधर रहे हैं। मीडिया की रिपोर्ट के अनुुसार हाल ही में मेडिकल चेकअप के लिए आसाराम को जोधपुर से दिल्ली के एम्स लाया गया था। जहां आसाराम ने एम्स के नर्स के गालों की तुलना कश्मीरी सेब से कर दी, जिससे वो झेंप गई।
गोवा में संंघ के विद्रोहियों का 11 को अधिवेशन, भाषा पर होगा रणनीतिक मंथन

गोवा में संंघ के विद्रोहियों का 11 को अधिवेशन, भाषा पर होगा रणनीतिक मंथन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से विद्रोह करके गोवा में समानांतर संगठन खड़ा करने वाले स्वयंसेवकों ने भविष्य कार्यक्रम तय करने के लिए 11 सितंबर को अधिवेशन बुलाया है। समानांतर संगठन आरएसएस के प्रदेश प्रमुख (प्रांत संघचालक) पद से हटाए गए सुभाष वेलिंगकर के समर्थन में खड़ा हुआ है और वही उसके कर्ता-धर्ता हैं। वेलिंगकर को प्रदेश की भाजपा सरकार का विरोध करने के कारण प्रांत संघचालक के पद से हटा दिया गया था।
मधुमेह, अस्थमा और बीपी के मरीज भी कर सकते हैं नेत्रदान

मधुमेह, अस्थमा और बीपी के मरीज भी कर सकते हैं नेत्रदान

देश में इस समय लाखों लोग नेत्रदान के जरिए आंखों की रोशनी पाने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन कई प्रकार की भ्रांतियों के चलते आज भी लोग उतनी संख्या में नेत्रदान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं जितनी जरूरत है। सच्चाई यह है कि मधुमेह, अस्थमा और ब्लड प्रेशर के मरीज भी आसानी से नेत्रदान कर सकते हैं।
कानून के छात्र संविधान ठीक से पढ़ें, लोकतांत्रिक प्रकिया को समझें: राष्ट्रपति

कानून के छात्र संविधान ठीक से पढ़ें, लोकतांत्रिक प्रकिया को समझें: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कानून के छात्रों से संविधान का ठीक से अध्ययन करने की अपील करते हुए रविवार को उनसे कहा कि वे शासन और राज्य से जुड़े सभी मामलों में भागीदारी कर उन परिवर्तनों का माध्यम बनें, जो वे चाहते हैं।
विश्वविद्यालयों को खुली अभिव्यक्ति और वाद-विवाद का केंद्र होना चाहिए: राष्ट्रपति

विश्वविद्यालयों को खुली अभिव्यक्ति और वाद-विवाद का केंद्र होना चाहिए: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को बिहार के नालंदा में कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थाओं को खुली अभिव्यक्ति का केंद्र होना चाहिए और वहां वाद-विवाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
लोढ़ा कमेटी की टिप्‍पणी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पोस्टमैन जैसा

लोढ़ा कमेटी की टिप्‍पणी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पोस्टमैन जैसा

देशभर में 35 नए मेडिकल कॉलेजों में पांच हजार से ज्यादा नई एमबीबीएस सीटों को मान्यता देने वाली सुप्रीम कोर्ट की हाई पॉवर कमेटी ने केंद्र सरकार और एमसीआई पर कई गंभीर टिप्पणियां की हैं। पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा, पूर्व सीएजी प्रमुख विनोद राय और एमसीआई के पूर्व चेयरमैन डाॅ. एसके सरीन की कमेटी ने अपने आदेश में कहा है कि देशहित से जुड़े इस अहम मुद्दे पर जहां केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पोस्टमैन जैसा काम कर रहा था, वहीं एमसीआई दोहरा,कुंठित और अड़ियल रवैया अपना रही थी। मजबूरन हमें ही कॉलेजों का पक्ष जांच कर मान्यता देने या नहीं देने का निर्णय लेना पड़ा।
आसाराम को अंतरिम जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, मेडिकल बोर्ड गठित किया

आसाराम को अंतरिम जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, मेडिकल बोर्ड गठित किया

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को बलात्कार के एक मामले में आसाराम को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने एम्स को एक मेडिकल बोर्ड गठित कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति पता करने को कहा।
सावधान : 57 % डॉक्‍टर बिना मेडिकल क्वालिफिकेशन के कर रहे आपका ईलाज

सावधान : 57 % डॉक्‍टर बिना मेडिकल क्वालिफिकेशन के कर रहे आपका ईलाज

विदेशों में शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य को जीवन का सबसे महत्‍वपूर्ण पहलू माना जाता है। लेकिन इससे उलट हमारे देश में इन दोनों क्षेत्रों पर घोर लापरवाही की जाती है। इसका एक सटीक उदाहरण विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की एक रिपोर्ट में आपको मिल सकता है।
खादी का नित दिन बढ़ता क्रेज : आईआईटी बाॅम्बे में दीक्षांत समारोह की होगी पोशाक

खादी का नित दिन बढ़ता क्रेज : आईआईटी बाॅम्बे में दीक्षांत समारोह की होगी पोशाक

देश मेंं खादी अब केवल नेताओं की पाेशाक नहींं रही। बल्कि खादी फैशन का ट्रेंड बन गई है। वह पढ़े-लिखे अभिजात्‍य वर्ग के जीवन का हिस्‍सा भी बनते जा रही है।
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