बिहार के मुजफ्फरपुर में बच्चों की दर्दनाक मौतें एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम की महामारी के फैलते प्रकोप का संकेत, स्वास्थ्य सेवा की उपेक्षा और दुर्दशा भी उजागर
इलाज के अभाव में काल के गाल में समाते बच्चे, भीड़ द्वारा बेकसूरों की हत्या, अर्थव्यवस्था के संदिग्ध आंकड़े तो न्यू इंडिया की नींव मजबूत नहीं करेंगे। सो, बातों और दावों से आगे बढ़ना होगा
कृषि के लिए उपलब्ध संस्थागत कर्ज में क्षेत्रीय गैर-बराबरी किसानी के संकट का एक बड़ा कारण, वंचित इलाकों खासकर पूर्वी और पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ नाइंसाफी घटे तो उपज भी बढ़ेगी और गरीबी भी घटेगी
सरकारी आंकड़ों पर संदेह के घने बादलों के बीच अर्थव्यवस्थात जीडीपी वृद्धि, रोजगार दर सहित हर मोर्चे पर बेहाल, मगर सबसे बड़ा सवाल कि संदिग्धर आंकड़ों के सहारे कैसे तैयार होगा मुकम्मल बजट
पिछले कुछ समय से देश की अर्थव्यवस्था को लेकर आ रहे आंकड़ों पर अब ऐसे विशेषज्ञ भी सवाल उठा रहे हैं, जो कभी सरकार का हिस्सा थे। इससे यह संशय पैदा हो गया है कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। इस पूरे मसले पर पूर्व चीफ स्टैटीशियन प्रणब सेन से आउटलुक के एसोसिएट एडिटर प्रशांत श्रीवास्तव की बातचीत के अंशः
हाल में गुजरात, उसके पहले दिल्ली, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में सफाई कर्मियों की सफाई के दौरान मौतें हुईं लेकिन शायद ही यह कोई मुद्दा बनता है। यही नहीं, यह काम आज भी एक खास जाति या तबके के जिम्मे ही है। पिछले 25 साल में उन्नीस सौ से ज्यादा कर्मचारी सफाई करते हुए मौत के मुंह में समा गए हैं। अरसे से इसके खिलाफ सक्रिय सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक और रैमन मैगसायसाय पुरस्कार विजेता बेजवाड़ा विल्सन से इस बेहद संगीन मसले पर संपादक हरवीर सिंह ने विस्तार से बातचीत की। प्रमुख अंशः
देश में पुरुष प्रधान समाज का एक और विद्रूप चेहरा सामने आने लगा, युवा स्त्रियों में स्तन कैंसर के मामलों में हुआ इजाफा, तो शादियां टूटने के मामले भी बढ़े