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Search Result : "पुस्तक गांव"

हीरे की खदान खातिर उजाड़ा जा रहा गांव

हीरे की खदान खातिर उजाड़ा जा रहा गांव

घने जंगलों के बीच बसा है मध्यप्रदेश का एक गांव उमरावन। जिसे अब उजाड़ा जा रहा है। गांववासियों के विस्थापन के लिए प्रशासन ने बिजली काट दी है। छोटे-छोटे बच्चों के साथ गांववासी स्याह अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
चिकित्सकों की गैरहाजिरी कोई नई बात नहीं

चिकित्सकों की गैरहाजिरी कोई नई बात नहीं

पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहितियां में सुबह के दस बजे पहुंचने पर पता चला कि अस्पताल बंद है। क्योंकि न तो अस्पताल में डाॅक्टर पहुंचे और न ही कंपाउडर। कोई सहायक भी नहीं है जो यह बता पाए कि डाॅक्टर कब आएंगे और अस्पताल कब खुलेगा।
आपातकाल की बरसी: दु:स्वप्न से ऐन पहले

आपातकाल की बरसी: दु:स्वप्न से ऐन पहले

वर्ष 1975 की 25 जून को इंदिरा गांधी सरकार ने आंतरिक आपातकाल की घोषणा की और भारतीय राजनीति के इस काले अध्याय से जुड़ी घटनाओं को तब अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस की एमसीडी बीट कवर करने वाली पत्रकार कूमी कपूर ने किताब की शक्‍ल दी है। यहां हम इस पुस्तक के कुछ अंशों को पाठकों के सामने ला रहे हैं जिनमें आपातकाल से ठीक पहले की घटनाओं का जिक्र है।
ग्रामीण राजस्थान में कन्या भ्रूण हत्या में कमी का दावा

ग्रामीण राजस्थान में कन्या भ्रूण हत्या में कमी का दावा

राजस्थान के जयपुर औऱ जोधपुर के छह जिलों में पंचायतों के साथ मिल कर चलाए जा रहे सीफार संस्था के प्रयासों से कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान का दिख रहा असर
सिनेमा का इतिहास और वर्तमान

सिनेमा का इतिहास और वर्तमान

हिंदी में सिनेमा के इतिहास पर सबसे नई पुस्तक है - समय, सिनेमा और इतिहास। हिंदी सिनेमा के सौ साल पूरे होने पर जश्न तो कई हुए, अखबारों, पत्रिकाओं में कई अहम विशेषांक भी निकले लेकिन पुस्तक के रूप में बॉलीवुड के इतिहास को नए तरीके से समेटने का काम कम हुआ। कुछ देर से ही सही, लेकिन संजीव श्रीवास्तव की यह पुस्तक इस मायने में काफी सराहनीय है। पुस्तक में शामिल सौ साल से अधिक के हिंदी सिनेमा की बड़ी तस्वीरें, व्यक्ति और समाज की अनुभूति और अभिव्यक्ति की बहुरंगी भाव-भंगिमाओं को विविघता से संजोए हुए हैं। यहां व्यावसायिकता की चकाचौंध है, तो कला की प्रांजलता भी। बाजार के दबाव और समझौते की कहानियां हैं तो प्रतिबद सामाजिक सरोकार के नजीर भी हैं।
‘सफल होने की होड़ और बाजारवाद चिंता का विषय’

‘सफल होने की होड़ और बाजारवाद चिंता का विषय’

लोगों में आज सफल होने की होड़ तेजी से बढ़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए जानी मानी लेखिका अलका सरावगी ने कहा कि आज बाजार सबके लिए मूल्यबोध के पैमाने बनने के साथ साधन एवं साध्य बन गया है और ऐसे में लेखकों की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है।
राजस्थान के गांव में दलितों की हत्या, बलात्कार से तनाव

राजस्थान के गांव में दलितों की हत्या, बलात्कार से तनाव

राजस्‍थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में दबंग जाट जाति के एक व्यक्ति की हत्या के बाद में तीन दलितों को ट्रैक्टर से रौंद कर मार डालने की घटना के बाद सामाजिक तनाव गहरा गया है।
राजस्थान में दलित क्यों असुरक्षित

राजस्थान में दलित क्यों असुरक्षित

राजस्‍थान में पिछले डेढ़-दो साल में दलित और सामाजिक तौर पर उपेक्षित वर्गों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले छह माह में दलित अत्याचारों की लहर सी आ गई है।
बिहार: नक्सलियों ने अगवाकर ग्रामीण की हत्या की

बिहार: नक्सलियों ने अगवाकर ग्रामीण की हत्या की

बिहार के गया जिला के डुमरिया थानांतर्गत प्रखंड के हुरमेठ गांव के एक ग्रामीण को उसके घर से अगवाकर काचर गांव के समीप ले जाकर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी है।
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