भारत में एक दशक में खेतिहर मजदूरों समेत आर्थिक गतिविधियों की विभिन्न श्रेणियों में शामिल लोगों के विवाह की औसत आयु में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। जिसे सकारात्मक माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा से भारतीय जनता पार्टी की सांसद हेमा मालिनी अपने संसदीय क्षेत्र में हिंसा की खबर जानने के बाद हिंसा में मारे गए पुलिस अधिकारियों के लिए संवेदना भी प्रकट की तथा अपनी शूटिंग की फोटो को भी ट्विटर से डिलीट कर दिया। हिंसा होने के बाद भी उनको इसकी जानकारी नहीं थी। वह अपने पिक्चर के प्रमोशन और शूटिंग में व्यस्त थीं। उन्हें शुक्रवार दोपहर को हिंसा का पता चला और इसके बाद दोपहर को ही उन्होंने कई ट्वीट किए और लिखा कि उन्हें अभी-अभी मथुरा में हुई हिंसा के बारे में पता चला।
बांग्लादेश में आकाशीय बिजली गिरने से मरने वालों की संख्या आज बढ़ कर 35 हो गई। तेज गरमी के बाद राजधानी ढाका समेत 14 जिलों में गरज के साथ छींटे पड़ने से लोगों को राहत तो मिली लेकिन इसके साथ ही आकाश से बिजली गिरी जिससे 35 लोगों की मौत हो गई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में छिटपुट हिंसा की खबरों के बीच 56 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान खत्म हो गया। आज के चरण के जिलों में कुल 79.70 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान के दौरान दिन भर राज्य के विभिन्न जिलों से सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की लगातार खबरें आती रहीं।
पाकिस्तान के लाहौर शहर में एक लोकप्रिय पार्क में कल तालिबान के भीषण आत्मघाती हमले में मरने वालों की संख्या 72 हो गई। हमले के समय पार्क में ईसाई लोग ईस्टर मना रहे थे।
अखबारों की छोटी सी खबर से आम जनता को पता चला कि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस होता है। हिंदी के प्रति प्रतिबद्ध सरकार में केवल विदेश मंत्रालय ने एक आयोजन किया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने वर्ष 2012 में सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली कूच करने की खबर को सच बताकर सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि, इस मुद्दे पर वह अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ते जा रहे हैं।
बताया जाता है कि जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में अपने शुरू किए गए अखबार नेशनल हेराल्ड के कर्मचारियों से एक बार कहा था, हमें बनियागिरी नहीं आई। यदि सुब्रह्मण्यम स्वामी की कोशिशें सिरे चढ़ीं तो माना जाएगा कि शायद नेहरू के उत्तराधिकारी इस कला को सीख चुके हैं।
प्रख्यात कवि वीरेन डंगवाल का मुंह के कैंसर से निधन हो गया। उनकी याद में कवि-कहानीकार प्रियदर्शन की कलम भी रो पड़ी। उन्हीं के शब्दों में, ‘मुंबई के रास्ते था। तभी वीरेन डंगवाल के न रहने की खबर सुनी। मन खराब हो गया। भिंची हुई रुलाई जैसा कुछ। इसी में जैसे तैसे कुछ लिखा। यह श्रद्धांजलि नहीं है। पता नहीं क्या है।’ तीन भावनाएं आउटलुक के पाठकों के लिए।