राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रिलायंस जियो की सस्ती डाटा स्कीम पर निशाना साधते हुए सवालिया लहजे में कहा कि गरीब डाटा खाएगा या आटा?
रिलायंस इंडस्टीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आज जियो के ग्राहकों के लिए मुफ्त वॉयस कॉलिंग, शून्य रोमिंग शुल्क और सस्ती डेटा दरों की घोषणा की। इसके अलावा अंबानी ने जियो ग्राहकों के लिए पांच सितंबर से 31 दिसंबर तक के लिए मुफ्त वेलकम ऑफर की भी घोषणा की। जियो शुरूआती चार महीनों के लिए मुफ्त डेटा सेवाओं की पेशकश कर रही है और उसके बाद वह डेटा के दस प्लानों की पेशकश करेगी।
यह सुनने में भले ही अजीब लग सकता है, लेकिन छोटी, बड़ी सभी चोरियों को साथ मिला दें तो देश में 2015 के दौरान 8,210 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों की चोरी की गई।
अमेरिका आने वाले लोगों के लिए एक बेहद कड़ी जांच प्रक्रिया का प्रस्ताव देने के एक दिन बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि वह राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो वे कट्टरता, घृणा और सख्ती छोड़ देंगे।
सोशल मीडिया पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के बाद यदि किसी को सबसे अधिक फॉलो किया जाता है, तो वो है हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मोदी अभी कम से कम तीन साल और इस पद पर बने रहेंगे जबकि ओबामा का कार्यकाल अागामी छह माह में खतम होने वाला है।
जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार देश में 72.89 करोड़ लोग नॉन वर्कर हैं। इनमें से 3.7 लाख लोग भिखारी हैं। आंकड़ों के अनुसार देश की कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 14.23% है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने उपभोक्ताओं को मिलने वाली तत्काल आधार पर मोबाइल इंटरनेट डेटा की गति मापने वाला एप पेश करते हुए कहा है कि वह एक महीने के अंदर वायरलेस डेटा के लिए नए सेवा गुणवत्ता नियम तय करेगा।
अभी टाइम्स नाऊ के एडिटर इन चीफ अरनब गोस्वामी द्वारा लिए गए पीएम मोदी के इंटरव्यू पर बहस समाप्त ही नहीं हुई थी कि पीएम माेदी के एक और इंटरव्यू की चर्चा सोशल मीडिया में चर्चा का केंद्र बन गई है। यूएई में रहने वाले एक जर्नलिस्ट ने मोदी का इंटरव्यू लेने का अनुभव फेसबुक पर शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम मोदी इंटरव्यू से पहले सवाल अपने पास मंगाते हैं।
कानून मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में 458 न्यायाधीशों की कमी है। ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब न्यायपालिका और सरकार के बीच हाईकोर्टों में न्यायाधीशों की भावी नियुक्ति को दिशा देने वाले एक दस्तावेज के विभिन्न उपबंधों को लेकर मतभेद हैं।