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प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा के खर्चे पर परदा क्यों

प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा के खर्चे पर परदा क्यों

सूचना के अधिकार के तहत मिला नरेंद्र मोदी की सिर्फ दो यात्राओं का आंशिक ब्यौरा। सेशल्स में 1,26,61,928 रुपये (एक करोड़, छब्बीस लाख, 61 हजार 9सौ अठाइस रुपये) और मॉरिशस में 13,792,690 (1करोड़, 37 लाख, 92 हजार, छह सौ नब्बे रुपये खर्च हुए और यह आंशिक खर्च है। आखिर क्यों नहीं दे रहा पीएमओ पूरा ब्यौरा?
ऋषिकेश में राफ्टिंग कैंपों की इजाजत नहींः एनजीटी

ऋषिकेश में राफ्टिंग कैंपों की इजाजत नहींः एनजीटी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आज उत्तराखंड में राफ्टिंग कैंपों को अनुमति देने के संबंध में एक याचिका पर सुनवाई के बाद फिलहाल इसकी इजाजत नहीं दी है। एनजीटी वन एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए काम करने वाली एक एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
केदारनाथ त्रासदी के नाम पर लूट

केदारनाथ त्रासदी के नाम पर लूट

उत्तराखंड में जून 2013 में आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के दौरान हजारों लोग कई दिनों तक भूखे रहने को मजबूर थे, बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे, सर्दी- बीमारी काल बन निगल रही थी, उस वक्त राहत के काम में जुटे राज्य सरकार के अधिकारी मटन, चिकन और बेहतरीन खाने का लुत्फ उठा रहे थे। सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के जरिये हुए इस सनसनीखेज खुलासे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
प्रधानमंत्री की चीन यात्रा का रणनीतिक महत्‍व

प्रधानमंत्री की चीन यात्रा का रणनीतिक महत्‍व

किसी भी दृष्टि से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया चीन यात्रा सफल कही जाएगी। इसमें भारतीय इनफ्रॉस्टक्चर क्षेत्र में 10 अरब डॉलर के चीनी निवेश 22 अरब डॉलर के व्यापार समझौतों सहित कई समझौते किए गए।
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का खर्च बताने में कैसी आनाकानी

प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का खर्च बताने में कैसी आनाकानी

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर आए खर्च से जुड़ी जानकारी उजागर नहीं किए जाने के बावजूद केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा गठित समिति ने सभी मंत्रालयों को इस तरह की जानकारियां उजागर करने और सक्रिय रुप से अपडेट करने निर्देश दिए हैं।
मंगोलिया में मोदी कूटनीति की घुड़-परीक्षा

मंगोलिया में मोदी कूटनीति की घुड़-परीक्षा

क्या बिना मीट परोसे आप किसी को सिर्फ मीट मसाला खिला सकते हैं? कूटनीतिक और राजनयिक समाचार कथाओं के संदर्भ में भारतीय मीडिया अक्सर यही करता है। वह मसाला चखाने के चक्कर में मीट परोसना भूल जाता है। विदेश नीति और राजनय से संबंधित घटनाक्रम अक्सर आम जनजीवन से इतने दूर और ओट में होते हैं कि आम दर्शक अमूमन मसाले को ही मीट समझने की भूल कर बैठता है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा की राजनयिक कथा में मंगोलिया दौरे की उपकथा की अहमियत भारतीय मीडिया की नजरों से ओझल रही और यह अहम उपकथा आम भारतीय दर्शक या पाठक की प्लेट में परोसी ही नहीं गई।
मोदी की 'शर्मिंदगी' पर सोशल मीडिया में उबाल

मोदी की 'शर्मिंदगी' पर सोशल मीडिया में उबाल

चीन और दक्षिण कोरिया में दिए नरेंद्र मोदी के उस बयान की तीखी आलोचना हो रही है जिसमें उन्‍होंने कहा था कि पहले लोगों को भारत में पैदा होने पर शर्मिंदगी होती थी लेकिन अब गर्व है।
विदेश में मोदी ने की 'विदेश नीति' की खिंचाई

विदेश में मोदी ने की 'विदेश नीति' की खिंचाई

मोदी ने लुक ईस्‍ट नीति पर पिछली सरकारों की खिंचाई करते हुए कहा कि हम ने पूरब की ओर बहुत देख लिया, अब इस पर काम करने का समय है। गौरतलब है कि 'लुक ईस्‍ट' नीति को वाजपेयी सरकार ने प्रमुखता से आगे बढ़ाया था।
मंगोलिया पर फिदा मोदी, 1 अरब डॉलर के कर्ज का ऐलान

मंगोलिया पर फिदा मोदी, 1 अरब डॉलर के कर्ज का ऐलान

चीन दौरे के बाद शनिवार को मंगोलिया पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों का ऐलान किया है। इसके तरह भारत की ओर से मंगोलिया को 100 करोड़ डॉलर (करीब 6300 करोड़ रुपए) का ऋण दिया जाएगा। रविवार को मोदी ने मंगोलिया की संसद को भी संबोधित किया।
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