देश के बैंक एक और माल्या का पता लगाने जा रहे हैं। बैंकों के समूह ने आलोक इंडस्ट्री और उसकी सहयोगी कंपनियों को चार माह पहले 20 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया था।
लखनऊ के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र ने शिक्षक द्वारा रिश्वत लेने के दबाव से तंग आकर आत्महत्या कर ली। छात्र को कक्षा में उपस्थिति के रिकॉर्ड के आधार पर परीक्षा प्रवेश पत्र मिलने से शिक्षक रोक रहा था। छात्र ने एक बार 20 हजार रुपया दे भी दिया और घूसखोर शिक्षक ने ज्यादा रकम मांगी। ऐसी मानसिक प्रताड़ना संपूर्ण शिक्षा-व्यवस्था और शासकीय तंत्र के लिए शर्मनाक है।
रियल एस्टेट कारोबार के लिए मंदी का दौर शीघ्र समाप्त होने की उम्मीद करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि इस क्षेत्र को बाजार अर्थव्यवस्था पर जीवित रहना होगा और सब्सिडी उसके अस्तित्व का मूलाधार नहीं होना चाहिए।
सह शिक्षा के इस्लामिक सिद्धांतों के अनुकूल ना होने की बात कहते हुए पाकिस्तान के एक धार्मिक संगठन ने सरकार से जल्द से जल्द पुरुषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग शिक्षा तंत्र स्थापित करने को कहा है।
निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक आईसीआईसीआई बैंक ग्रामीण इलाकों में ग्राहकांे को 15 लाख रुपये तक का ऋण आधार दर पर उपलब्ध कराएगा। आधार दर बैंकों की कर्ज पर ली जाने वाली सबसे निम्न ब्याज दर होती है। बैंक महिलाआंे को पहले ही आधार दर पर कर्ज उपलब्ध करा रहा है।
हमारे देश के राजनेताओं की नासमझी कभी-कभार बड़ी हास्यास्पद बन जाती है। झारखंड की शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने तो कोडरमा के एक स्कूल कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम को श्रद्धा सुमन ही अर्पित कर दिए।
केरल में नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों के न पहुंचने पर विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के आर. राजेश ने शिक्षामंत्री पी के अब्दुरब को कुरान के सूरे का हवाला देते हुए कहा कि कुरान में दान के अलावा वादा निभाने की शिक्षा भी दी गई है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक संगठन ने शिक्षा नीति में बदलाव कर संस्कृत या अन्य शास्त्रीय भाषाओं जैसे अरबी, फारसी, लैटिन और ग्रीक को कम से कम चार वर्ष तक स्कूली शिक्षा में अनिवार्य बनाने की सलाह दी है।
दालों की बढ़ती महंगाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने दालों के आयात का फैसला किया है जबकि चीनी मिलों को 6 हजार करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त कर्ज दिया जाएगा। इससे पहले भी केंद्र और राज्य सरकारें चीनी मिलों को कई राहत पैकेज दे चुकी हैं। इसके बावजूद गन्ना किसानों को करीब 21 हजार करोड़ रुपये का भुगतान चीनी मिलों के पास अटका हुआ है।