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आसान नहीं है ऑस्ट्रेलिया से भारत की जीत

आसान नहीं है ऑस्ट्रेलिया से भारत की जीत

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविवार को होने वाले लगभग क्वार्टर फाइनल मुकाबले में भारत को अपने प्रदर्शन में काफी सुधार करना होगा ताकि टी20 क्रिकेट विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई जा सके। लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने जिस आक्रामकता से पाकिस्तान और बांग्लादेश को हराया है, उससे भारत के लिए क्वार्टर फाइनल की राह आसान नहीं लग रही है।
श्रीलंका पर जीत से भारत शान से फाइनल में

श्रीलंका पर जीत से भारत शान से फाइनल में

पहले गेंदबाजों ने कमाल दिखाया तो बाद में विराट कोहली और युवराज सिंह ने विपरीत अंदाज में खूबसूरत पारियां खेली जिससे भारत ने मंगलवार को मीरपुर में श्रीलंका को पांच विकेट से हराकर लगातार तीसरी जीत दर्ज करके एशिया कप ट्वेंटी20 क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।
प्रचार के हल्ला-बोल में चुनावी गणित का उतार-चढ़ाव

प्रचार के हल्ला-बोल में चुनावी गणित का उतार-चढ़ाव

शुरुआती दौर में बिहार के शहरों में भाजपा प्रचार में आगे दिख रही है। अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए ऊंची जातियों को सक्रिय करने में सफल रही है, लेकिन आपसी फूट भी जबर्दस्त है। बिहारी मतदाता अपने पत्ते अभी खोलने को तैयार नहीं
विंबलडन के फाइनल में पहुंचीं सानिया और हिंगिस

विंबलडन के फाइनल में पहुंचीं सानिया और हिंगिस

स्टार भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने विंबलडन के महिला युगल मुकाबले के फाइनल में जगह बनाई। अगर खिताब जीता तो ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी होंगी।
राजकमल चौधरी का रचना संसार

राजकमल चौधरी का रचना संसार

राजकमल प्रकाशन से आठ खंडों में प्रकाशित राजकमल चौधरी रचनावली के प्रथम दो खंडों में कविता, तीसरे-चौथे खंड में कथा, पांचवे-छठे खंड में उपन्यास, सातवें खंड में निबंध-नाटक और अंतिम खंड में पत्र-डायरी को शामिल किया गया है।
धर्म और धुंध

धर्म और धुंध

संजीव श्रीवास्तव पेशे से टीवी पत्रकार हैं। उनकी एक पुस्तक - समय, सिनेमा और इतिहास भारत सरकार के प्रकाशन विभाग से प्रकाशित है। संजीव की कविताओं में धर्म, राजनीति और इस सबके बीच पिसती मनुष्यता का ऐसा विवरण है जो किसी को भी सोचने पर मजबूर कर सकता है।
लोकतांत्रिक तरीके से चुना व्यक्ति भी तानाशाह हो सकता हैः नामवर सिंह

लोकतांत्रिक तरीके से चुना व्यक्ति भी तानाशाह हो सकता हैः नामवर सिंह

आलोचना (त्रैमासिक) पत्रिका के अंक 53-54 के प्रकाशन के उपलक्ष्य में ‘भारतीय जनतंत्र का जायजा’ विषय पर साहित्य अकादमी-सभागार में आयोजित परिचर्चा में युवाओं की भागीदारी जबरदस्त रही। दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सहित अन्य अकादमिक संस्थानों के छात्रों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। युवाओं ने जनतंत्र से जुड़े सवालों की झड़ी लगा दी। एक युवा ने सवाल खड़ा किया कि आखिर क्यों ‘आलोचना’ पहले जैसी नहीं होती ! जिसकी आलोचना होती है वह और मजबूत क्यों हो जाता है।
वाणी का 51वां स्थापना दिवस

वाणी का 51वां स्थापना दिवस

वाणी प्रकाशन के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्स में ‘एथनोग्रफिक-हिस्ट्री-ऑफ-बुक्स बनाम कहानी-किताब-की’ कार्यक्रम हुआ। वक्ताओं में आशीष नंदी, मृणाल पांडे और अभय कुमार दूबे थे। कार्यक्रम की शुरुआत वाणी के निदेशक अरुण महेश्वरी ने की। यह कार्यक्रम वाणी प्रकाशन के इक्क्यावनवें स्थापना दिवस पर आयोजित किया गया था।
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