दिल्ली स्थित भारतीय महिला प्रेस क्लब (इंडियन वीमेन्स प्रेस कार्प्स) के वर्ष 2016-17 के लिए हुए चुनाव में वरिष्ठ पत्रकार सुषमा रामचंद्रन को सर्वसहमति से अध्यक्ष चुन लिया गया है। जबकि प्रबंधन कमेटी में पत्रकार कुमकुम चड्ढा और पत्रकार रेणु अगल को उपाध्यक्ष चुना गया है। पत्रकार अरुणा सिंह महासचिव, स्वतंत्र पत्रकार गीताश्री ज्वाइंट सेक्रेटरी और ‘दि ट्रिब्यून’ की पत्रकार अदिति टंडन को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
आरोन फिंच के नाबाद अर्धशतक की मदद से गुजरात लायंस ने शनिवार को आईपीएल के बेहद रोमांचक मैच में मुंबई इंडियंस को आखिरी गेंद पर तीन विकेट से हराकर लगातार तीसरी जीत दर्ज की। मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज घरेलू मैच में दूसरी बार नाकाम रहे और आठ विकेट पर सिर्फ 143 रन बना सके।
दिल्ली सरकार सम-विषम योजना का दूसरा चरण कल से शुरू करने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है और इस सिलसिले में अगले 15 दिनों तक रोजाना सड़कों पर 2000 यातायात कर्मी, 580 प्रवर्तन अधिकारी एवं 5000 से अधिक नागरिक रक्षा स्वयंसेवक तैनात किए जाएंगे।
भारतीय हॉकी टीम बुधवार को 25वें अजलान शाह कप हॉकी टूर्नामेंट के राउंड रॉबिन मैच में न्यूजीलैंड से 1-2 से हार गई। इस हार से भारत के फाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है।
श्रीनगर स्थित एनआईटी परिसर में मंगलवार को एक बार फिर स्थिति तनावपूर्ण हो जाने के बाद बुधवार को मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने स्थिति का जायजा लेने के लिए दो सदस्यीय एक दल को श्रीनगर भेजा। पिछले सप्ताह टी20 विश्व कप में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम की हार के बाद से एनआईटी परिसर में रह रहे छात्रों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है।
बसपा प्रमुख मायावती पठानकोट में हुए आतंकी हमले की जांच के लिए पाकिस्तान से आई टीम को लेकर सरकार को आगाह किया है। बसपा प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान की जांच टीम ने जिस तरह का नकारात्मक रवैया अपनाया है उसे लेकर भारत सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए।
आलोचकों के कोपभाजन बने वकार युनूस ने आज भारी मन से पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनकी सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया जिससे टीम आगे नहीं बढ सकी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब कारोबारी विजय माल्या को तीसरा और संभवत: आखिरी समन जारी कर उन्हें 9 अप्रैल को मुंबई में जांच अधिकारियों के समक्ष पेश होने को कहा है।
भारत के राजनीतिक भविष्य का एजेंडा कॉरपोरेट घराने तय कर रहे हैं। इस कारण प्रबंधन कंपनियों या यूं कहें कि कई प्रबंधन गुरुओं की पौ-बारह हो गई है और राजनीतिक दल उनके सामने नतमस्तक दिख रहे हैं।