दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में योग गुरू रामदेव को भाषण देने के लिए आमंत्रित करने पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा समर्थित अखिल भारतीय विद्याथी परिषद (एबीवीपी) ने रामदेव को बुलाने का स्वागत किया है जबकि वामपंथी छात्र संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।
योग गुरू रामदेव ने आज संकेत दिया कि वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का अपना दौरा रद्द कर सकते हैं, जहां उन्हें मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधन के लिए आमंत्रित किया गया है। वहीं विश्वविद्यालय ने एक छात्र समूह की आमंत्रण वापस लेने की मांग ठुकरा दी है।
पूरे विश्व में योग का डंका बजाने वाले बीकेएस आयंगर का आज 97वां जन्मदिवस है। योग के प्रति उन्होंने लोगों में चेतना जगाई और देश के साथ विदेश में भी योग के प्रति चेतना को आगे बढ़ाया।
बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद के आटा नूडल्स को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। हाल ही में लॉंच किए गए आटा नूडल्स को बिना इजाजत के बाजार में उतारने पर एफएसएसआई ने नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के कार्यक्रम में आमंत्रित किए गए भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ को आज इलाहाबाद में प्रवेश लेने से रोक दिया गया। अधिकारियों का दावा है कि इस समारोह के लिए अनुमति नहीं ली गई थी।
भारतीय संस्कृति और योग में लघु-अवधि पाठ्यक्रम शुरू करने के एक प्रस्ताव को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परिषद ने खारिज कर दिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ संवाद के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रस्ताव के साथ आगे आया था।
हिंदी के नामचीन कथाकार उदय प्रकाश की हिंदुत्व वादी ताकतों द्वारा कन्नड़ विद्वान एमएम कलबुर्गी की हत्या के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा सोशल मीडिया पर विवादों में आ गई है। अब उदय प्रकाश के भी गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ के हाथों पुरस्कार लिया था। शाम तक तो उदय प्रकाश की तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे थे लेकिन उसके बाद गड़े मुर्दे उखड़ गए। खबर लिखे जाने तक उदय प्रकाश के पक्ष में आवाजें नहीं आई थीं-
आंगन के पार पूरब में कमरे थे, कमरों के पार दालान। दालान के पार रास्ता था, रास्ते के पार आंवला, कनेर और बेल के पेड़ थे, फिर मेड़ की आड़। आड़ के पार पोखर था जिसके जल में आसमान में उगता गोल और सुर्ख सूरज टलमल करता था। पोखर के पार दादा जी (छोटे बाबा) की कुटी थी जिसमें एक कमरे के ऊपर उजियार कमरा था और नीचे अंधेरा तहखाना। कुटी के पार आमों के बाग थे, बाग के पार दूर तक खेत-सरेह। दूर सरेह के पार बडक़ी नहर की आड़ दिखती थी। लेकिन इस सुदूर विस्तार में हजारों, सैकड़ों या बीसियों तक क्या, इक्का-दुक्का भी समवेत योग नहीं होता था।