'चुनावी चाणक्य' प्रशांत किशोर चुनाव में जीत का एक भरोसा है। पहले पीएम मोदी, बाद में नीतीश कुमार और अब कांग्रेस इनकी मदद से सत्ता के सिंहासन तक पहुंचना चाहती है। इनकी चुनावी रणनीति काफी पुख्ता होती है। प्रशांत इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी नाम से एक संस्था चलाते हैं। यह संस्था ही किसी पार्टी के प्रचार अभियान का काम देखती है। बताया जाता है कि प्रशांत किशोर की इस संस्था में करीब 250 लोग काम करते हैं।
उत्तर प्रदेश में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कवायद के बीच कांग्रेस ने सीटों की संख्या को लेकर अपनी मंशा साफ कर दी हैैैै। चुनावी समर में प्रदेश में अपनी जगह बनाने के लिए कांग्रेस ने गठबंधन की कोशिशें तेज भी कर दी हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब तक दो बार सपा सुप्रीमों से मुलाकात कर चुके हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने सीटों को लेकर चुनावी रणनीति तैयार कर ली है। स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें कम से कम 125 से 150 सीटें चाहिए।
सेक्स सीडी कांड में गंभीर आरोपों के चलते जेल गए आप सरकार में दिल्ली के पूर्व मंत्री संदीप कुमार को सोमवार को कोर्ट से जमानत मिल गई है। तीस हजारी कोर्ट ने उन्हें जमानत दी है। उन पर लगे आरोपों के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन की कवायद के बीच कांग्रेस के लिए काम कर रहे चुनावी रणनीतिकार प्रशान्त किशोर ने आज सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से एक बार फिर मुलाकात करके हलचलें बढ़ा दी हैं।
मंच के कवि होने के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय कुमार विश्वास के मुताबिक केंद्र की सरकारों ने उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं दिया और राजनीतिक विचार नहीं मिलने के कारण उन्हें सरकारी कार्यक्रमों तक में आमंत्रित नहीं किया जाता।
लखनऊ में 5 नवंबर को समाजवादी पार्टी के 25वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हिस्सा नहीं लेंगे। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वयं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने गुरुवार की रात नीतीश कुमार को फोन किया था।
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की मुलाकात के बाद सपा और कांग्रेस में गठबंधन की खबरेंं आई। मुलायम सिंह यादव और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच बातचीत भी हुई। सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव और प्रशांत किशोर की भेंट और फिर पीके की मुलायम से दो घंटे से ज्यादा की बातचीत गठबंधन के साफ संकेत है। सियासी चर्चा महागठबंधन की है।
जेएनयू प्रशासन ने छात्रों और शिक्षकों से परिसर में विघ्नकारी राजनीति और प्रदर्शनों को हतोत्साहित करने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि इससे विश्वविद्यालय का सुगमतापूर्वक चलने वाला कामकाज बाधित हो रहा है और प्रदर्शनों के जरिए अतार्किक मांगें उठायी जा रही हैं।