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बांग्लादेश में एक उम्रदराज बौद्ध भिक्षु की निर्मम हत्या

बांग्लादेश में एक उम्रदराज बौद्ध भिक्षु की निर्मम हत्या

बांग्लादेश के दक्षिण पश्चिम में स्थित एक बौद्ध मठ में रहने वाले एक 70 वर्षीय उम्रदराज बौद्ध भिक्षु की कुछ अज्ञात लोगों ने मठ के भीतर हत्या कर दी। सिर्फ एक ही हफ्ते पहले इसी तरह के एक हमले में एक मुस्लिम सूफी प्रचारक की हत्या कर दी गई थी।
फिर जी उठे बैजू बावरा

फिर जी उठे बैजू बावरा

11वीं सदी के भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक शहर चंदेरी, जो बुंदेलों और मालवा के शासकों द्वारा बनवाया गया। ऐतिहासिक इमारतों और गुप्त, प्रतिहार, गुलाम, तुगलक, खिलजी, अफगान, गौरी, राजपूत और सिंधिया वंश द्वारा शासित रहा चंदेरी अब खास रेशमी के कपड़ों के लिए भी जाना जाता है। इससे इतर अपने कलात्मक इतिहास के कारण चंदेरी कभी सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी जाना जाता था।
गांधी: बस नाम ही बाकी है

गांधी: बस नाम ही बाकी है

राष्ट्रपिता के रूप में ख्याति पाने वाले शख्स के नाम पर पूरे भारत में ढेरों संस्थाएं हैं, जिनका बस 'नाम’ ही बाकी रह गया है
ये बच्चे बदललेंगे कल की तस्वीर

ये बच्चे बदललेंगे कल की तस्वीर

दिल्ली का इंडिया हैबिटैट सेंटर में रोज की तरह गहमा गहमी है। यहीं के एक हॉल में बिहार के अलग-अलग जिले से कुछ बच्चे आए हुए हैं, जोश और आत्मविश्वास से भरे हुए। अपनी बात कहने के लिए तत्पर।
कांग्रेस मुखपत्र में ही नेहरू, सोनिया की तीखी आलोचना, संपादक बर्खास्त

कांग्रेस मुखपत्र में ही नेहरू, सोनिया की तीखी आलोचना, संपादक बर्खास्त

कांग्रेस को सोमवार को उस समय शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब उसीके मुखपत्रा ने कश्मीर मामले पर जवाहरलाल नेहरू की नीति की आलोचना की और आरोप लगाया कि सोनिया गांधी के पिता एक फासीवादी सैनिक थे। पार्टी अपने स्थापना दिवस पर सामने आए इस विवाद से असहज स्थिति में आ गई है। हालांकि संपादकीय मंडल के सदस्य और कांग्रेस नेता भूषण पाटिल ने बताया कि पत्रिका के संपादक सुधीर जोशी को बर्खास्त कर दिया गया है।
उषाकिरण खान की कहानी: राधा नागरि

उषाकिरण खान की कहानी: राधा नागरि

पद्मश्री से सम्मानित हिंदी -मैथिली की चर्चित लेखिका। भामति एक अविस्मरणीय प्रेम कथा के लिए मैथिली का साहित्य अकादमी पुरस्कार। सृजनहार उपन्यास के लिए कुसुमांजलि फाउंडेशन पुरस्कार।
अमीर खुसरो की कविता, शिरीन की कहानी

अमीर खुसरो की कविता, शिरीन की कहानी

हजरत अमीर खुसरो की लिखी रुदार ए शिरीन एक ऐसी स्त्री की जीवन गाथा है जिसमें वह अपनी पहचान और अस्तित्व ढूंढने की कोशिश करती है। इसे संगीतमय रूप में दिल्ली घराने की महिला कलाकारों ने प्रस्तुत किया है। रुदार ए शिरीन यानी शिरीन की कहानी की मंच पर संगीतमय प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।
ऐ जालंधर की हवाओ तुम वीजा की मोहताज नहीं

ऐ जालंधर की हवाओ तुम वीजा की मोहताज नहीं

पाकिस्तानी सूफी गायक अदील खान बर्की जब भी हिंदुस्तान आते हैं एक तकलीफ के साथ यहां से जाते हैं। बंटवारे के वक्त बर्की के बुजुर्गों को जालंधर से लाहौर पड़ा था। उनके दादा और वालिद की तमन्ना थी कि आखिरी वक्त में एक दफा वह जालंधर जरूर जाएं लेकिन वीजा की दिक्कतों के चलते उन्हें यह नसीब न हो सका। ऐसे में अदील खान के दादा और वालिद के खाक-ए-सुपुर्द होने के बाद उन्होंने उनकी कब्र पर कत्बा लगवाया, जिसपर लिखा ‘ए जालंधर की हवाओ अगर कभी इस तरफ से गुजरो तो कुछ देर इस कब्र पर ठहर जाना, तुम नहीं जानती कि मरने वाला तुम्हें कितना याद करता है क्योंकि तुम बदनसीब इंसानों की तरह वीजा की मोहताज नहीं हो।’ इस दफा जब अदील खान हिंदुस्तान आए तो आउटलुक की विशेष संवाददाता ने उनसे विशेष बातचीत की-
एक शाम वतन की राह पर

एक शाम वतन की राह पर

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के स्पेशल सीपी और चर्चित बांसुरी वादक मुक्तेश चंद्र जी ने पहली बार देश भक्ति के गीतों पर अपनी बांसुरी की तान छेड़ी।
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