'मैंने मंटो पर फिल्म क्यों बनाई, इस्मत पर क्यों नहीं'
मैं उस समय दिल्ली के श्रीराम कॉलेज में पढ़ रही थी। हमारे कॉलेज में अफासानानिगार सआदत हसन मंटो की कहानी पर एक नाटक का मंचन हुआ। मंचन बहुत बेकार था लेकिन उसे देखने के बाद मुझे लगा कि मुझे मंटो को पढ़ना है। मैंने उनकी तमाम कहानियां, लेख और पत्र पढ़े।