देश के निर्यात में मई में भी गिरावट रही और यह एक साल पहले इसी माह की तुलना में 20.19 प्रतिशत गिरकर 22.34 अरब डॉलर रह गया। यह लगातार छठा महीना है जबकि निर्यात संकुचित हुआ। निर्यात में गिरावट मुख्य तौर पर वैश्विक नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण है। तेल के दाम गिरने से पेट्रोलियम उत्पादों की निर्यात आय प्रभावित हुई है।
ऐसा लगता है कि मोदी सरकार का पहला साल कारोबारी जगत को रास नहीं आ रहा। तभी तो शेयर बाजार लगातार बेजार होता जा रहा है और सेंसेक्स पिछले चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
विदेशी निवेशकों द्वारा हाथ खींचने के कारण शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक लगातार दूसरे दिन लुढ़कता रहा। आज यह तकरीबन 300 अंक गिरकर लगभग 27 हजार पर पहुंच गया जो कि एक सप्ताह में सबसे बड़ी गिरावट है।
देशभर में ईसाईयों के खिलाफ हो रहे हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी कड़ी में राजस्थान के आदिवासी इलाकों में हर दिन ईसाईयों के खिलाफ कुछ न कुछ घटनाएं सामने आ रही हैं। नागरिक अधिकार संगठन पीयूसीएल की हाल ही में आई रिर्पोट के अनुसार उदयपुर जिले मे ईसाईयों के खिलाफ गंभीर मामले सामने आए हैं। इन्हें इनके पूजा करने के संवैधानिक अधिकार तक से वंचित किया जा रहा है। आदिवासी ईसाईयों को भयभीत किया जा रहा है।
तेल कीमतों में नरमी का लाभ उठाते हुए भारत अपना पहला रणनीतिक तेल भंडार भरने का काम अगले महीने शुरू करेगा। इसका मकसद किसी प्रकार की आपूर्ति संबंधी बाधाओं से बचना है।
देश का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर गिरा है। सालाना आधार पर तुलना करें तो इस साल जनवरी में यह 11.19 प्रतिशत गिरकर 23.88 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि सस्ते तेल के आयात के कारण व्यापार घाटा थोड़ा सुधरा है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ योजना को इससे गहरा झटका लग सकता है।