Advertisement
मैगज़ीन डिटेल

हर शब्द एक वसीयत

केदारनाथ सिंह की कविताएं न तो स्‍थूल शब्‍दों के घेरे में बंद नजर आती हैं, न आलंकारिक प्रयोगों से लैस

स्वायत्त संस्थाएं और लोकतंत्र

स्वायत्त संस्‍थाएं लोकतंत्र की नींव की तरह हैं। उन पर चोट लोकतंत्र पर चोट कहलाएगी। बेहतर यही होगा कि उन्हें राजनैतिक दखलंदाजी से दूर रखा जाए

सीबीआइ संकट के लंबे होते साए

संकट सिर्फ देश की प्रमुख जांच एजेंसी तक ही सीमित नहीं, आइबी, ईडी समेत तमाम आंतरिक सुरक्षा तंत्र भी इसके लपेटे में

विवादों का पोस्टर ब्वॉय

चारा घोटाले में लालू के खिलाफ जांच से अस्थाना ने बनाई थी राजनीतिक दबाव में नहीं आने वाले अधिकारी की छवि

आखिर अंतिम दौर में अड़े

मातहतों के बीच बेहद लोकप्रिय वर्मा पहली बार विवादों में

“डायरेक्टर को कमजोर करके दूसरा पावर सेंटर खड़ा करने से बिगड़ी बात”

सीबीआइ में विच हंटिंग की परंपरा पुरानी, लेकिन मौजूदा विवाद नए कल्चर की शुरुआत

“हर संस्था की साख हुई चौपट”

केंद्र सरकार सभी संस्थाओं को ही ध्वस्त कर रही है, ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट का रोल बेहद अहम

सरकार ने देर से लिया एक्शन

अगर इस तरह सिस्टम के साथ खिलवाड़ किया जाएगा तो ऐसा ही होगा, इसके लिए सरकार जवाबदेह

मोहभंग के डरावने नतीजे

बेहद मामूली वोट प्रतिशत ने बनाया चुनाव को प्रहसन, विधानसभा चुनाव के पहले हालात सुधारने की चुनौती

मेवाड़ जीतो, बनो सिकंदर

आदिवासी बहुल सीटों के नतीजे ही तय करते रहे हैं प्रदेश की सरकार, इसलिए भाजपा-कांग्रेस के दांव भारी

प्रत्याशियों पर सिमटी रणनीति

विकास और बदलाव के नारे के बीच उम्मीदवारों की साख ही तय करेगी नतीजे, भाजपा-कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नाम के ऐलान से चौंकाया

जाति गणित की गोलबंदी

एससी/एसटी एक्ट से अगड़ी जातियां भाजपा से नाराज, तो राहुल की मंदिर दर्शन से वोट में सेंध की कोशिश

शिव पेच और सपाई दांव

भारतीय जनता पार्टी की शह से शिवपाल सिंह यादव कितनी काटेंगे अखिलेश की जमीन

एनडीए में कुशवाहा क्लेश!

बराबर सीटों पर लड़ने के भाजपा-जदयू की घोषणा से रालोसपा के तेवर तीखे

बिखरता कुनबा

टकसाली नेताओं के इस्तीफे से बिगड़ी बात, सुखबीर बादल से बनाई दूरी

सरकार बेख्याल, अवैध खनन बेलगाम

खनन माफिया के सामने प्रशासन बेबस, कागजी कार्रवाई से लोगों में नाराजगी बढ़ी

अब अदालत ही सरकार

अतिक्रमण, बाघ, दवाइयों, अस्पतालों, हड़ताल सब की खबर सिर्फ हाइकोर्ट के आसरे

सौतेले व्यवहार से दो-चार

पुरुष वेस्टइंडीज मैच के लिए महिला टी-20 वर्ल्डकप से ऐन पहले टीम का कैंप वानखेड़े से बदला

राम नाम जपना, सारा संसार अपना

वसुधैव कुटुंबकम का वास्तविक अर्थ बड़ा गूढ़ है और इसे वे लोग ही समझते हैं, जो बार-बार इसका इस्तेमाल करते हैं

उदार और समरसता की परंपरा खतरे में

सुप्रीम कोर्ट के महिलाओं के प्रवेश से पाबंदी हटाने के ताजा फैसले की ही नहीं, अय्यपा की प्राचीन अवर्ण-आदिवासी परंपरा और पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी की भी जारी है घोर अवहेलना

हलो-हलो...कॉल ड्रॉप की क्या है कहानी

सरकार, कंपनियां सब एक-दूसरे को दोष दे रहीं मगर लोगों की परेशानी की फिक्र कहीं नहीं

कॉल ड्रॉप 100 फीसदी खत्म करना संभव नहीं

ट्राई ने स्वतंत्र रूप से अलग-अलग शहरों का टेस्ट ड्राइव शुरू किया है, लेकिन ये समस्या एक झटके में दूर नहीं हो पाएगी

ट्राई को फ्रीडम की जरूरत

कॉल ड्रॉप, अनचाही कॉल यानी पेस्की कॉल या फिर स्लो इंटरनेट स्पीड इन सब पर कस्टमर लाचार है

डीएनए रहस्य !

जीवन के मूल सारतत्व डीएनए पर नए अनुसंधानों ने डाली नई रोशनी

गठीले बदन का सौंदर्य

मछलियां जल में ही नहीं रानी बेटियों की बाजुओं पर भी उभरती हैं

“जनता समझदार हो गई है, सोचकर वोट देगी”

शुरू में नोटबंदी का नुकसान हुआ। लोग परेशान हुए। लोगों की नौकरियां गईं, गांवों की तरफ पलायन भी बढ़ा। ग्लोबल परिस्थितियों का भी प्रेशर था

समाजवाद का नेपाली रिश्ता

यह किताब कथा शैली में जिस तरह उस दौर की याद दिलाती है, वह नई पीढ़ी के लिए यकीनन नई शिक्षा प्रदान करती है

अब घर आया अस्पताल

शहरी भारत में बीमार बुजुर्गों की तीमारदारी के लिए कम खर्च में घर पर ही देखभाल का बढ़ रहा चलन

राष्ट्र, राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद

आज की राष्ट्रीयता और इतिहास में दर्ज राष्ट्रीयता में सिर्फ नजरिए का फर्क है, जिसे समझना जरूरी है

Advertisement
Advertisement
Advertisement