छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों से की गई मेरी रिपोर्टिंग नक्सलवाद, पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दों को उजागर करने के लिए जानी जाती रही है
जमानत हक है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 में रहने, जीने और जीविका चलाने के अधिकार के अलावा उस मूलभूत न्याय-सिद्धांत से निकलता है कि आरोप साबित न हो, तब तक हर कोई बेकसूर है
जेल के बाद जिंदगी मुश्किल होती है। हम उन खुशकिस्मत लोगों में हैं, जिनके पास सामाजिक पूंजी है, दोस्त, परिवार, दूसरे एक्टिविस्ट, हमारे संगठन, हमारे संपर्क, हमारी शिक्षा, सिविल सोसाइटी जो हमें टिके रहने में मदद करती है
कैदियों में यह धारणा है कि जब किसी को जमानत मिलती है, तो सह-आरोपियों को भी जल्द ही उसी आधार पर जमानत मिल जाएगी। यह कहना मुश्किल है ऐसा कब होगा, इसमें छह महीने या छह साल भी लग सकते हैं
मीडिया ट्रायल को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। झूठे मामले को आगे बढ़ा रही जांच एजेंसी जानती थी कि अदालत में उनका पक्ष टिक नहीं पाएगा। इसलिए उसने हमारे खिलाफ एक कहानी गढ़ने के लिए मीडिया का सहारा लिया
न्याय में देरी का खामियाजा आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को उठाना पड़ता है। यह कड़वी सच्चाई है कि चर्चित मामलों के आरोपी अक्सर लंबा समय जेल में नहीं बिताते। उनके पास अच्छे वकील होते हैं, सो उन्हें जमानत जल्दी मिल जाती है