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सप्तरंग

ग्लैमर जगत की खबरें

आवरण कथाः हक नहीं,हुक्म का इंसाफ

जमानत हक है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 में रहने, जीने और जीविका चलाने के अधिकार के अलावा उस मूलभूत न्याय-सिद्धांत से निकलता है कि आरोप साबित न हो, तब तक हर कोई बेकसूर है

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘ कैद में भी उम्मीद जिद की तरह अटकी है ’’

अंतरिम जमानत के बाद जब घर गया था, तो उम्मीद थी कि शायद फैसला हक में हो।

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘जमानत थोड़ी राहत जैसी, जिंदगी तो खो गई’’

जेल बेतुकी बातों की फैक्ट्री है, जो रोज बेरोकटोक चलती है। मसलन, हर सुबह सेल खोले जाते थे, तो यह रस्म डंडों की खड़खड़ाहट के साथ शुरू होती थी

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘अंडा वॉर्ड की तन्हाई में, हमने गाने की हिम्मत की’’

हर मुद्दे में संघर्ष था। जेल में, कोई भी अनुरोध, चाहे वह कितनी भी बुनियादी चीज का हो, तुरंत स्वीकार नहीं होता। यह इनकार से ही शुरू होता है

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘जेल के बाद जिंदगी मुश्किल, निगरानी और उत्पीड़न जारी’’

जेल के बाद जिंदगी मुश्किल होती है। हम उन खुशकिस्मत लोगों में हैं, जिनके पास सामाजिक पूंजी है, दोस्त, परिवार, दूसरे एक्टिविस्ट, हमारे संगठन, हमारे संपर्क, हमारी शिक्षा, सिविल सोसाइटी जो हमें टिके रहने में मदद करती है

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘जिंदा बाहर आना चमत्कार’’

2020 में गिरफ्तारी के बाद मुझे कोविड हो गया और उसी दौरान आंखों में संक्रमण हो गया। मेरी स्थिति बहुत खराब हो गई।

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘जेल में अदालती तारीखों के अंतराल ही गिनती रही’’

कैदियों में यह धारणा है कि जब किसी को जमानत मिलती है, तो सह-आरोपियों को भी जल्द ही उसी आधार पर जमानत मिल जाएगी। यह कहना मुश्किल है ऐसा कब होगा, इसमें छह महीने या छह साल भी लग सकते हैं

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘भाषा से वंचित करने की पीड़ा’’

यरवदा जेल में कंबल दिलवाना भी बड़ी चुनौती थी। अदालत के आदेश का इंतजार करना पड़ा था

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘मेरी गिरफ्तारी और जेल पूर्वाग्रह से तय थे’’

जेल और आरोपियों के साथ बर्ताव से ऐसा लगा जैसे यह किसी दूसरे जमाने की दुनिया है, ऐसा जमाना जहां कानून का राज नहीं

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘सच्चाई कहने की भारी कीमत’’

छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों से की गई मेरी रिपोर्टिंग नक्सलवाद, पुलिस कार्रवाई, मानवाधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दों को उजागर करने के लिए जानी जाती रही है

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘‘सवाल उठाएं या चुप्पी साध लें’’

राकेश रोशन किरो को जेल की सलाखें भी चुप नहीं करा पाईं

आवरण कथा/जेल डायरीः ‘सत्रह साल के जख्म’

मीडिया ट्रायल को हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया। झूठे मामले को आगे बढ़ा रही जांच एजेंसी जानती थी कि अदालत में उनका पक्ष टिक नहीं पाएगा। इसलिए उसने हमारे खिलाफ एक कहानी गढ़ने के लिए मीडिया का सहारा लिया

क्रिकेटः सियासी फिरकी का फेरा

टी20 विश्व कप में सियासी विवाद इस कदर हावी हुए कि खेल पर उसके काले साए पसरने लगे

बाल फिल्में: जाने कहां ये फिल्में गई

बच्चों की फिल्में केवल अर्थशास्त्र का ही मसला नहीं, बल्कि इसके पीछे वह कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता है, जो दिन ब दिन सिकुड़ती जा रही है

भारत-अमेरिका व्यापारः बदलेगा रुझान

अमेरिकी निवेश में बढ़ोतरी और देश के रणनीतिक झुकाव में रूस-चीन से दूरी भी अहम

दुनियादारीः सिख गौरव गाथा

दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के मलावी में सिखों ने खुद का विशेष स्थान बनाया और समावेशिता की मिसाल बने

प्रथम दृष्टि: दुरुस्ती में देरी क्यों?

न्याय में देरी का खामियाजा आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को उठाना पड़ता है। यह कड़वी सच्चाई है कि चर्चित मामलों के आरोपी अक्सर लंबा समय जेल में नहीं बिताते। उनके पास अच्छे वकील होते हैं, सो उन्हें जमानत जल्दी मिल जाती है

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पाठको की चिट्ठियां

शहरनामा: नाहन

नाहन की संस्कृति में पहाड़ी परंपराओं और मैदानी प्रभावों का सुंदर मेल है

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