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मैगज़ीन डिटेल

“कोरोना को रोकने के लिए जो भी सख्ती करनी पड़ेगी, करेंगे”

लॉकडाउन के दो महीने में हमारे आइटी प्रोजेक्ट तेजी से बढ़े हैं। ई-गवर्नेंस के माध्यम से आखिरी छोर के गरीब आदमी को सरकारी स्कीमों का सीधा लाभ मिला है। हमारी पारदर्शी सरकार है

आपदा, अवसर और स्वावलंबन

जब देश और दुनिया में स्थितियां सामान्य थीं, तो स्वावलंबन को मजबूत करने से किसने रोका था और जब नीतियां बेहतर थीं तो करोड़ों गरीब मजदूरों को पैदल चलकर अपने गांव क्यों लौटना पड़ा

कृषि पैकेज, मार्केटिंग रिफॉर्म्स और राजनीति के पेच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 मई को राष्ट्र को संबोधन में देश की अर्थव्यवस्था को कोविड-19 महामारी से उबारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम राहत पैकेज की घोषणा के बाद से ही समाचार माध्यमों में लगातार बड़ी सुर्खियां बन रही हैं।

घाटी में आतंक का नया चेहरा

उत्तरी कश्मीर में भारी नुकसान के बाद सुरक्षा बलों को नायकू के मारे जाने से कामयाबी की उम्मीद, पर टीआरएफ की शक्ल में नई मुसीबत

योगी के नाम पर सैर

विधायक अमनमणि त्रिपाठी को एसीएस के पत्र पर डीएम ने दिया पास

बेमौत मरने की त्रासदी

भूख, भय, लाचारी से प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक स्थिति, कुछ की मौत जैसे दृश्य की मिसाल ढूंढ़ना मुश्किल

कानूनी सुरक्षा भी हटी

श्रम कानूनों में बदलाव संवैधानिक ढांचे पर आघात है, यह भारत को सौ साल पीछे ले जाएगा

लॉकडाउन की बलि

वायरस तो डरावना पर उसकी रोकथाम के अनियोजित उपायों ने लील लीं कई जिंदगियां

अव्यवस्था ने बनाया अजनबी

समय रहते अगर राहत देने के कदम उठाए गए होते तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती

राहत पहुंचाने का समय

लॉकडाउन से देश का मजदूर लाचार है, तुरंत ठोस योजना को अमल में लाने की जरूरत

नेटवर्क गायब होने की ढलान

स्टाफ में भारी कटौती से सेवाएं प्रभावित, वेतन और वेंडर पेमेंट में देरी

पहली किस्त तो नाकाफी

प्रधानमंत्री के 20 लाख करोड़ के पैकेज के ऐलान के बाद िवत्त मंत्री के छह लाख करोड़ के पैकेज में मजदूर वर्ग को राहत नहीं

लाचार मजदूरों पर हथौड़ा

उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश ने आर्थिक सुधार के नाम पर श्रम कानूनों को किया कमजोर, केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल

बढ़ता ही जा रहा है खतरा

मई के आंकड़े काफी डरावने, टेस्ट कम होने से चिंता बढ़ी, कोरोना संक्रमण से जल्द राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम

आगे घर पीछे भूख

कोरोना वायरस से नहीं बल्कि लॉकडाउन से दर-दर भटकती जिंदगी कैमरे की जुबानी

कैसे शुरू हो पढ़ाई

महामारी और लॉकडाउन से बैठे शिक्षा हलके में असमंजस भारी, ई-लर्निंग पर कई तरह के सवाल

“कोई भी जांच से अछूता नहीं रहेगा”

हम विश्वास से कह सकते हैं कि जरूरी अस्पतालों, बेड, वेंटिलेटर की न तो अभी कमी महसूस की जा रही है, न भविष्य में कमी होने वाली है

“पढ़ाई पटरी पर लाने के दिशानिर्देश जल्द”

'स्वयं' पर 1,902 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। अभी 26 लाख छात्र 574 पाठ्यक्रमों का लाभ ले रहे हैं, ऑनलाइन डिग्री पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराने की तैयारी है

कोई जल्दी नहीं

सप्‍तरंग

तंगहाल बजट स्कूल

इन स्कूलों की फीस कम, सरकारी मदद भी नहीं, पढ़ाई जारी रख पाना चुनौतीपूर्ण

संकट में करोड़ों छात्र

सरकार की रणनीति अधूरी, करोड़ों छात्र-छात्राओं के पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए सुविधाएं नहीं

ऑनलाइन शिक्षा स्वप्न

मौजूदा शिक्षण प्रणाली सिर्फ क्लास रूम में पढ़ाई के अनुकूल

मध्यम वर्ग पर भारी चोट

सरकारें ही वेतन नहीं दे पा रही हैं तो कंपनियों से कर्मचारियों को वेतन देने की उम्मीद करना बेमानी

कीटनाशक घटे तो कृषि बढ़े

कीटनाशक विधेयक में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है ताकि किसानों को संरक्षण दिया जा सके

सुधारों में किसान कहां

लॉकडाउन में एपीएमसी सुधारों के जरिए कॉरपोरेट को लाभ दिलाने जैसे एकतरफा फैसले किसानों के हक में कितने

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