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मैगज़ीन डिटेल

आवरण कथा/बिहार: नीतीश का पंछी मन

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार का एक बार फिर लालू प्रसाद की राजद को छोड़ जाना और वापस एनडीए में आना उनकी राजनीतिक सूझ-बूझ का परिचायक माना जाए या कुर्सी के लिए वैचारिक अवसरवाद का ऐतिहासिक प्रदर्शन?

हरियाणा: रोजगार चाहिए, इजरायल जाओ

केंद्र सरकार इजरायल से भारतीयों को सुरक्षित निकालने में लगी है तो हरियाणा सरकार युवाओं को वहां नौकरी के नाम पर भेज रही

छत्तीसगढ़: माओवादियों पर कड़ी दबिश

भाजपा सरकार ने नए सिरे से खोला माओवादियों के खिलाफ मोर्चा

आवरण कथा/विपक्ष: ‘इंडिया’ टूटेगा या जोर का जुटेगा?

भाजपा की चालें और ईडी की दबिश ही बताती है कि विपक्षी गठजोड़ अभी कमजोर नहीं

आवरण कथा/नजरिया: अयोध्या कांड बनाम नीतीश कांड

नीतीश की भूख सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी से पूरी होती है

क्रिकेट/ईशान किशनः पैसे और पॉलिटिक्स की फिरकी

युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन को वाकई आराम की दरकार थी या आराम करने भेज दिया गया?

सिनेमा: 2024 की बहुप्रतीक्षित फिल्में

2024 में कुछ ऐसी फिल्में आने वाली हैं, जिनका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं

सप्तरंग

ग्लैमर जगत की खबरें

भारत रत्न: हाशिए के लोगों के नायक

भारतीय राजनीति के प्रतीक-पुरुषों को सत्ता की मर्यादाहीन राजनीति में इस्तेमाल कर लगातार उनकी अवमानना की जा रही

मंदिर के मायने/नजरियाः राम मंदिर का चुनावी नफा और नुकसान

रामायण के विभिन्न पात्रों का जो विशिष्ट सामाजिक-कथात्मक आधार है, यही भाजपा को आगामी चुनावों में लाभांश देगा

मंदिर के मायने/दक्षिण भारत: राम का चुनावी असर, उत्तर भारत के पार

राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा की अनुगूंज उत्तर को पार करके दक्षिण के राज्यों तक पहुंच चुकी है, कर्नाटक से लेकर केरल तक प्रचारक और स्वयंसेवक अक्षत लेकर पहुंचे

मंदिर के मायने/हिमाचल प्रदेशः पालमपुर बैठक और राम मंदिर

पालमपुर में 1989 की भाजपा कार्यसमिति में राम मंदिर का ऐतिहासिक प्रस्ताव पास हुआ था, उस वक्त सूबे में वीरभद्र सिंह की कांग्रेसी सरकार थी, लेकिन उन्होंने पूर्ण सहयोग किया, यानी राम मंदिर निर्माण में हिमाचल का योगदान है अहम

गांधी पुण्यतिथि विशेष: गांधी के राम और रामराज्य

आज राम के नाम पर जितना कुछ और जैसा कुछ हुआ है, उसकी चर्चा के साथ गांधी को जोड़ना एक तरह का गुनाह है

पुस्तक समीक्षा: घटनाओं के जरिए राजनीति

दयाशंकर मिश्र ने ‘राहुल गांधी’ के नाम से लिखी किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को खबर-दर-खबर के तौर पर उभारा

पुस्तक समीक्षाः प्रेमपत्रों के चांद

बेहतरीन प्रेमपत्रों की किताब

पुस्तक समीक्षा: नैतिक मूल्यों का अधिष्ठाता

पंद्रह जनजातियों के सामूहिक संघर्ष का प्रतिफल

प्रथम दृष्टि: कांग्रेस का संकट

राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता का कोई साझा मंच तैयार होता है तो प्रादेशिक पार्टियों के नेताओं को उसका सिरमौर कांग्रेस को ही मानना होगा। जिन्हें यह स्वीकार नहीं होगा उनकी राहें जुदा हो जाएंगी, जैसा संभवतः नीतीश के मामले में हुआ। बेहतर है कांग्रेस अपने संगठन को हिंदी पट्टी में मजबूत करे

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पाठको की चिट्ठियां

शहरनामा: धार

राजा भोज की नगरी