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मैगज़ीन डिटेल

नये दौर की दस्तक

सांप्रदायिक ताकतों के विघटनकारी मंसूबों की काट के लिए राहुल जैसे साहसी नेता की दरकार

लोकतंत्र या भीड़तंत्र!

असल में राजनीतिक दल और नेता लोगों को लुभाने के आसान उपाय ढूंढ़ रहे हैं। यही वजह है कि असली मुद्दों की तरफ ध्यान ही नहीं है। फिर आरोप-प्रत्यारोप के लिए जिस तरह तथ्यों की अनदेखी की जा रही है, उससे राजनीति नीचे की ओर ही जा रही है

राहुल के लिए मौका तो माकूल

कांग्रेस उपाध्यक्ष के लिए देश की सबसे पुरानी पार्टी की कमान संभालते ही कई चुनौतियां सामने

मुकाबले की कितनी तैयारी

फिलहाल तो यह कांटों का ताज है, इसे कब और कैसे फूलों की माला बना पाएंगे राहुल

हर जन संघर्ष का साथी

किसानों, कामगारों, मजदूर और वंचितों के लिए संघर्ष करना है उनका मकसद

पुरानी कांग्रेस कहां लौटा पाएंगे

राहुल या उनके परिवार के किसी में न तो गांधी के असली गुण हैं और न ही नेहरू जैसा प्रभामंडल

बत्तीस साल बाद वही टार्गेट, वही फार्मूला

जातीय समीकरण हावी होने से विकास गायब, लोगों की नाराजगी भी नतीजों को कर सकती है प्रभावित

दलित राजनीति की माया

राज्य के स्थानीय चुनावों में प्रदर्शन तय कर सकता है बसपा की दलित सियासत की दिशा

महज नाम का एम्स

भोपाल एम्स में न तो पूरे डॉक्टर हैं, न ही हर इलाज की सुविधा

गुस्से में गजराज

हाथियों के हमले से इस साल जा चुकी हैं 44 लोगों की जान, फसलों को भी होता है भारी नुकसान

स्कूलों का कायापलट

शिक्षा पर फोकस से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदली, छात्र-अभिभावकों में पब्लिक स्कूलों का आकर्षण घटा

बल्लेबाजी की गहराई पर प्रश्नचिह्न

असली चुनौती बाकी, दक्षिण अफ्रीका के तेज विकेट पर होगा कड़ा इम्तिहान

जमीन से जुड़ा अभिनेता

संजय मिश्रा आज के दौर का जाना-पहचाना नाम हैं। कॅरिअर और जिंदगी के बीच संतुलन साधता यह अभिनेता सहजता की मिसाल है

हंसने की चाह ने जिसे बहुत रुलाया

संगीतकार कनु राय इतने तंगहाल थे कि उनके पास अपना हारमोनियम तक न था

बरबादियों के जश्न की मिठाई

वैसे भी उत्सवप्रिय हैं हम लोग

यह खेल तो महज सियासी

हर दौर में राजनीतिक पा‌र्टियां अपने स्वार्थ के लिए साहित्य, फिल्म और अन्य विधाओं को लेकर जनता की भावनाएं भड़काती हैं

औरतों पर ही यह बोझ क्यों

किडनी देने वालों में लगभग 85 प्रतिशत महिलाएं जबकि पाने वालों में उनका प्रतिशत सिर्फ दस

सूरज की रोशनी से रात भी जगमग

सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करने की बढ़ती संभावनाओं, घटती लागत और बैट्री की दुनिया में आई तकनीकी छलांग से आसान हुआ हरित ऊर्जा क्रांति का सफर

नोएडा से इस्लामाबाद

आइटी क्षेत्र में बुलंदी का अगला मुकाम बनने को पाकिस्तान कितना तैयार? भारत में तो नौकरियां खत्म होने का सिलसिला जारी

नई कोशिशों का जमा-हासिल

नए लेखकों और उपेक्षित भाषा-बोलियों के साहित्य पर जोर से किताबों की बिक्री और नए इलाकों में पहुंच बढ़ी

किसानों की आय बढ़ाना पहला लक्ष्य

किसानों का आय बढ़ाने में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए सरकार के साथ-साथ बाकी हितधारकों को भी मिल-जुलकर प्रयास करने होंगे

एक विस्मृत गांधी

स्वीडिश पत्रकार ने बरसों से जुटाई जानकारी रखी है सामने

हिंसा के विभिन्न आयाम

कुछ साल से भारत में राजनीतिक-सामाजिक हिंसा बढ़ती जा रही है

‘मानुष-मर्म’ के कवि

वादों-प्रतिवादों के बीच भी कुंवर नारायण को ‘स्वीकृति’ मिली तो यह उनके ‘नैतिक’ लेखन का ही बल था

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